US-Iran Tensions: अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम (सीजफायर) को लेकर चल रही कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। ईरान ने प्रस्तावित वार्ता में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की उम्मीदें कमजोर पड़ गई हैं। यह जानकारी एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि मध्यस्थता प्रयास फिलहाल ठहराव की स्थिति में पहुंच गए हैं।
इस्लामाबाद में बैठक से किया इंकार
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने मध्यस्थ देशों को स्पष्ट कर दिया है कि वह आने वाले दिनों में इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों से मिलने के लिए तैयार नहीं है। ईरान का कहना है कि अमेरिका की ओर से रखी गई शर्तें पूरी तरह अस्वीकार्य हैं, इसलिए बातचीत का कोई सवाल ही नहीं उठता।
पाकिस्तान की मध्यस्थता पर असर
इस घटनाक्रम से पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों को भी झटका लगा है। पाकिस्तान ने पहले अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता की मेजबानी करने की पेशकश की थी। देश के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा था कि पाकिस्तान इस तरह की बातचीत में सहयोग करने के लिए तैयार है और इसे सम्मान की बात मानता है। हालांकि, अब बातचीत आगे न बढ़ने के कारण यह पहल फिलहाल ठंडी पड़ गई है।
अमेरिका ने जताई थी प्रगति की उम्मीद
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिए थे कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में प्रगति हो रही है। उन्होंने कहा था कि वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन इस पर ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई थी। ईरान के इनकार के बाद अब इन दावों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
ईरान ने 15 सूत्रीय प्रस्ताव ठुकराया
ईरान के प्रवक्ता एस्माइल बाघई ने साफ किया है कि अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका की “गलत और ज्यादा” मांगें मध्यस्थों के जरिए भेजी गई थीं। ईरान को अमेरिका की ओर से 15 बिंदुओं का प्रस्ताव मिला था, जिसे उसने “अवास्तविक और बेकार” बताते हुए खारिज कर दिया।
तनाव बढ़ने के आसार
ईरान ने यह भी कहा कि वह पाकिस्तान के जरिए होने वाली किसी भी वार्ता का हिस्सा नहीं है। हालांकि उसने यह जरूर माना कि युद्ध खत्म होना अच्छा होगा, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि संघर्ष की शुरुआत किसने की, यह नहीं भूलना चाहिए। मौजूदा हालात को देखते हुए क्षेत्र में तनाव बढ़ने और संघर्ष लंबा खिंचने की आशंका जताई जा रही है।
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