Middle East Crisis: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब एक नए और ज्यादा खतरनाक चरण में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है। ताजा घटनाक्रम में ईरान के भीतर सैन्य ठिकानों के साथ-साथ सिविल और आर्थिक ढांचे को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के कई अहम इलाकों पर एयरस्ट्राइक की है, जिनमें तेहरान, इस्फ़हान और होर्मोज़गान के रणनीतिक स्थान शामिल हैं।
सिविल टारगेट्स पर हमलों से बढ़ी चिंता
इस नए फेज की सबसे चिंताजनक बात यह है कि हमलों का दायरा अब सिविल टारगेट्स तक पहुंच गया है। जानकारी के मुताबिक, ब्रिज, अस्पताल, मेडिकल लैब और स्टील प्लांट जैसे जरूरी ढांचों को निशाना बनाया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इन हमलों का मकसद केवल सैन्य क्षमता को कमजोर करना नहीं, बल्कि सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स को भी बाधित करना है।
ट्रंप के बयान के बाद तेज हुआ संघर्ष
इस पूरे घटनाक्रम के बीच डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने तनाव को और बढ़ा दिया। उन्होंने ईरान को “पाषाण युग” में पहुंचाने की चेतावनी दी थी। उनके संबोधन से पहले युद्ध खत्म होने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन इसके बाद हालात और बिगड़ते नजर आए।
पाश्चर इंस्टीट्यूट पर किया हमला
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि देश के प्रतिष्ठित पाश्चर इंस्टीट्यूट पर हमला किया गया है, जो इंटरनेशनल नेटवर्क का हिस्सा है। अधिकारी ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा पर सीधा हमला बताया और विश्व स्वास्थ्य संगठन तथा रेड क्रॉस से हस्तक्षेप की अपील की।
ईरान और इजरायल के बीच जवाबी कार्रवाई
ईरान की आईआरजीसी फोर्स ने इज़रायल की ओर मिसाइलें दागीं, जिसके बाद जवाबी हमले और तेज हो गए। इज़रायली सेना का दावा है कि उसने पिछले 24 घंटों में हिज़्बुल्लाह के 40 से ज्यादा लड़ाकों को मार गिराया। वहीं, लेबनान स्थित संगठन का कहना है कि उसने दक्षिणी लेबनान और उत्तरी इज़रायल में कई हमले किए हैं। लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने देश के हालात को बेहद नाजुक बताया है।
भारी जनहानि और बढ़ता मानवीय संकट
28 फरवरी से अब तक हुए हमलों में ईरान में करीब 2,076 लोगों की मौत और 26,500 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर है। लगातार हो रहे हमलों से आम नागरिकों की स्थिति गंभीर बनी हुई है।
क्या अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन?
अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों ने इस पूरे घटनाक्रम पर गंभीर चिंता जताई है। अमेरिका के 100 से अधिक विशेषज्ञों ने एक खुला पत्र जारी कर कहा है कि ईरान पर हमले युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून और मानवीय कानून के संभावित उल्लंघन की आशंका जताई है। जिनेवा कन्वेंशन के अनुसार, युद्ध के दौरान नागरिक ठिकानों पर जानबूझकर हमला करना गंभीर अपराध माना जाता है। इसमें बंधक बनाना, नागरिकों की हत्या, युद्धबंदियों के साथ अमानवीय व्यवहार और बच्चों को युद्ध में झोंकना जैसे कृत्य शामिल हैं।
अब क्या होगा आगे?
ईरान की सेना ने साफ किया है कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक उसके दुश्मनों को सरेंडर करने पर मजबूर नहीं कर दिया जाता। साथ ही, उसने अमेरिका द्वारा संभावित जमीनी हमले की चेतावनी भी दी है। ऐसे में मिडिल ईस्ट में हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।
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