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ईरान युद्ध के बीच भारत का रूस की ओर रुख, तेल आयात 40% तक बढ़ने का अनुमान…

जनवरी में, जब भारत अमेरिका के साथ निर्यात पर लगाए गए टैरिफ में राहत पाने की बातचीत कर रहा था, तब नई दिल्ली ने रूस से कच्चे तेल की खरीद में कटौती की थी। उस समय यह कदम अमेरिकी दबाव में उठाया गया “कठिन समझौता” माना गया। लेकिन महज दो महीने में परिस्थितियाँ पूरी तरह बदल गई हैं। अब भारत और रूस अपने ऊर्जा सहयोग को फिर से मजबूती देने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं।

LNG और कच्चे तेल पर नई पहल

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत और रूस(India Russia oil imports) के बीच लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सीधे आपूर्ति फिर से शुरू करने पर सहमति बनी है। यूक्रेन युद्ध के बाद यह पहली बार होगा जब रूस सीधे भारत को LNG बेचेगा। इस “मौखिक सहमति” की पुष्टि 19 मार्च को दिल्ली में रूसी उप ऊर्जा मंत्री पावेल सोरोकिन और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के बीच हुई बैठक में हुई।

साथ ही रूस से कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ाने पर भी सहमति बनी है। अनुमान है कि आने वाले महीने में रूस से भारत का तेल आयात दोगुना होकर 40% तक पहुंच सकता है।

पश्चिम एशिया संकट का असर

ईरान पर अमेरिका-इज़राइल हमले और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़े तनाव ने भारत की ऊर्जा आपूर्ति को सीधे प्रभावित किया, क्योंकि देश का करीब आधा तेल और LNG इसी मार्ग से आता है। इसके परिणामस्वरूप देश में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें, रसोई गैस की कमी और ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल देखा गया।

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