Kannauj Cyber Fraud: कन्नौज में साइबर ठगों ने एक सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापिका और उनके पति को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जाल में फंसाकर 8 लाख से ज्यादा की ठगी कर ली। आरोपियों ने खुद को गृह मंत्रालय के डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड का अधिकारी बताकर दंपती को करीब 50 घंटे तक मानसिक दबाव में रखा और डराकर पैसे ट्रांसफर करवा लिए।
फर्जी अधिकारी बनकर लगाया गंभीर आरोप
पीड़ित कालिका प्रसाद मिश्रा, निवासी छिबरामऊ, ने साइबर थाने में दर्ज कराई शिकायत में बताया कि उनकी पत्नी रामा देवी मिश्रा के मोबाइल पर 23 मार्च की शाम करीब 4:30 बजे कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड ऑफ इंडिया का अधिकारी ‘राजेश कुमार मिश्रा’ बताया। उसने दावा किया कि रामा देवी के आधार कार्ड से एक सिम और बैंक खाता खोलकर टेरर फंडिंग और बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक वीडियो फैलाने में इस्तेमाल किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट वारंट का डर दिखाया
इसके बाद ठगों ने व्हाट्सएप कॉल के जरिए खुद को मुंबई का जांच अधिकारी ‘इंस्पेक्टर संदीप राव’ बताया और सुप्रीम कोर्ट के वारंट का हवाला देकर दंपती को डराया। उन्होंने मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर दोनों को डिजिटल अरेस्ट में ले लिया और लगातार निगरानी में रखा।
डर के कारण ट्रांसफर किए लाखों रुपये
ठगों ने 23 मार्च से 25 मार्च की सुबह तक दंपती को दबाव में रखा और उनके बैंक खातों व गोपनीय जानकारी हासिल कर ली। मुकदमे से बचाने के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने को मजबूर किया गया। डर के चलते कालिका प्रसाद मिश्रा ने इंडसइंड बैंक, कोलकाता स्थित एक खाते में आरटीजीएस के जरिए 8,10,512 रुपये भेज दिए।
जांच में जुटी पुलिस
जब दंपती को ठगी का एहसास हुआ तो उन्होंने तुरंत साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। साइबर थाना प्रभारी विश्वनाथ मिश्र ने बताया कि मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है और आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की जा रही है।
जिले का पहला ‘डिजिटल अरेस्ट’ केस
पुलिस के अनुसार, जिले में इस तरह का यह पहला मामला सामने आया है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 में ही कन्नौज में साइबर थाना स्थापित किया गया था। यह घटना एक बार फिर साइबर ठगी के नए तरीकों को बताती है, जहां अपराधी लोगों को डराकर बड़ी रकम ठग रहे हैं।
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