अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा फैसला लेते हुए ईरान के ऊर्जा ढांचे पर सैन्य हमलों को पांच दिनों के लिए टालने का निर्देश दिया है। ट्रंप ने कहा कि हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच हुई बातचीत सकारात्मक रही है, जिसके चलते यह कदम उठाया गया है।
कूटनीतिक बातचीत को मिला बढ़ावा
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर कहा कि पिछले दो दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बेहद उत्पादक बातचीत हुई है। इन चर्चाओं का उद्देश्य मिडिल ईस्ट में जारी टकराव का समाधान निकालना है। उन्होंने संकेत दिया कि अगर वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो आगे भी सैन्य कार्रवाई टाली जा सकती है। गौरतलब है कि इससे पहले ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी कि यदि 48 घंटे के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाएगा। हालांकि अब अचानक आए इस फैसले से संकेत मिल रहे हैं कि दोनों देश टकराव से पीछे हटकर बातचीत के रास्ते पर आना चाहते हैं।
ईरान ने दी चेतावनी
ईरान ने भी पहले स्पष्ट कर दिया था कि उसके ऊर्जा ढांचे पर हमला हुआ तो वह खाड़ी क्षेत्र में स्थित अहम ठिकानों को निशाना बनाएगा। ईरानी संसद के स्पीकर और IRGC ने भी अमेरिकी ठिकानों और सहयोगी देशों को चेतावनी दी थी, जिससे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया था। बता दें कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल और गैस गुजरता है, इस विवाद का केंद्र बना हुआ है। ईरान द्वारा जहाजों की आवाजाही सीमित करने से वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखी गई है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर कई साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं।
भारत समेत कुछ देशों को आंशिक राहत
हालांकि ईरान ने भारत, चीन, रूस और पाकिस्तान जैसे कुछ देशों के जहाजों को सीमित रूप से गुजरने की अनुमति दी है, लेकिन आपूर्ति पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। इससे भारत जैसे देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर भी असर पड़ा है।
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