जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की शुरुआत 28 मार्च से होने जा रही है। आधुनिक तकनीक से तैयार इस एयरपोर्ट का कुल क्षेत्रफल 1,334 हेक्टेयर है और इसमें ILS (इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम) तकनीक का प्रयोग किया गया है, जिससे कोहरे और खराब मौसम में भी विमान सुरक्षित लैंड कर सकेंगे।
एयरपोर्ट का रनवे 3,900 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा है। यहां से प्रतिवर्ष लगभग 2.5 मिलियन टन कार्गो संभाला जा सकेगा। पहले चरण में एयरपोर्ट से देश के प्रमुख 11 शहरों- वाराणसी, लखनऊ, अहमदाबाद, हैदराबाद, बेंगलुरु, मुंबई, पटना, चेन्नई, जयपुर, कानपुर और श्रीनगर के लिए उड़ान भरेगी। यह सुविधा न केवल यात्रियों के लिए समय और दूरी बचाएगी, बल्कि रोजगार और व्यापार में भी नई संभावनाएं खोलेगी।
ILS तकनीक से उड़ानों में देरी नहीं
उत्तर भारत में सर्दियों के चार महीने में कोहरे की वजह से उड़ानों में देरी और रद्द होने की समस्या आम होती है। जेवर एयरपोर्ट में ILS तकनीक होने से यह समस्या दूर होगी और विमान हर मौसम में समय पर उड़ान भर सकेंगे।
भविष्य में एयरोसिटी
इस एयरपोर्ट को भविष्य में 5,100 हेक्टेयर तक विस्तारित किया जाएगा और यह सिर्फ हवाई अड्डा नहीं बल्कि एयरोसिटी के रूप में विकसित होगा, जहां विश्व स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
सुरक्षा और कार्गो सुविधा
एयरपोर्ट पर सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के पास होगी, जिसमें पहले चरण में 1,047 जवान तैनात होंगे। इसके अलावा एयरक्राफ्ट रिस्क और फायर फाइटिंग की आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगी।
प्रधानमंत्री उद्घाटन करेंगे
जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन 28 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। एयरपोर्ट के खुलने के बाद दिल्ली एयरपोर्ट पर दबाव कम होगा और उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के लोग सीधे यहां से देश के विभिन्न शहरों के लिए उड़ान भर सकेंगे।