पंजाब सीएम भगवंत सिंह मान(CM Bhagwant Singh Mann) ने लुधियाना में टाटा स्टील के अत्याधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल ग्रीन स्टील प्लांट का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि पंजाब अब देश का पहला राज्य बन गया है, जहां हरित इस्पात का उत्पादन शुरू हुआ है। उन्होंने टाटा समूह की सराहना करते हुए कहा कि कंपनी सिर्फ आर्थिक रूप से ही नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से भी समृद्ध सोच रखती है।
CM मान ने कहा कि पंजाब की धरती पर छोटे विक्रेता से लेकर बड़ी कंपनियों तक सभी के लिए समान अवसर हैं और यहां किसी के साथ भेदभाव नहीं होता। कार्यक्रम के दौरान टाटा स्टील के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने जानकारी दी कि हलवारा से दिल्ली के बीच हवाई सेवा के लिए टिकट बुकिंग जल्द शुरू होने वाली है, जिससे क्षेत्र को और बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
प्लांट में हुआ कितने पैसों का निवेश ?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्लांट में करीब 3,200 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है और इससे 2,500 से अधिक लोगों को सीधे रोजगार मिलेगा, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से इससे कहीं ज्यादा लोगों को फायदा पहुंचेगा। यह टाटा स्टील का देश में दूसरा स्क्रैप आधारित ग्रीन स्टील प्लांट है, जो आधुनिक तकनीक के जरिए इस्पात उत्पादन को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाता है।
यह संयंत्र लुधियाना के हाई-टेक वैली क्षेत्र में लगभग 115 एकड़ में फैला हुआ है और इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता 0.75 मिलियन टन है। यहां मुख्य रूप से निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाले टीएमटी बार और अन्य स्टील उत्पाद बनाए जाएंगे। इस परियोजना से राज्य सरकार को जीएसटी, बिजली और अन्य करों के माध्यम से हर साल करीब 200 से 300 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की उम्मीद है।
CM मान ने युवाओं के रोजगार पर दिया जोर
CM मान ने युवाओं को रोजगार से जोड़ने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर कर उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान करना है। उनके मुताबिक, इस तरह की परियोजनाएं युवाओं को विदेश जाने की बजाय अपने राज्य में ही बेहतर भविष्य बनाने का मौका देती हैं।
डिजिटल और ऑटोमेटेड सिस्टम से लैस प्लांट
तकनीकी रूप से यह संयंत्र काफी उन्नत है। इसमें इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (EAF) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे कोयले की जगह बिजली के जरिए स्टील तैयार होगा। स्क्रैप मेटल को पिघलाकर नया इस्पात बनाया जाएगा, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
साथ ही, पानी और ऊर्जा की खपत भी पारंपरिक संयंत्रों की तुलना में कम होगी। डिजिटल और ऑटोमेटेड सिस्टम से लैस यह प्लांट आधुनिक औद्योगिक विकास का उदाहरण माना जा रहा है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पंजाब में औद्योगिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।