Pakistan Crisis Amid War: पाकिस्तान इस समय आर्थिक और रणनीतिक मोर्चों पर एक साथ कई चुनौतियों से जूझ रहा है। अमेरिका-ईरान युद्ध से पैदा हुए तेल संकट, पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव और तेजी से बढ़ते कर्ज ने देश की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव डाल दिया है। इन तीनों वजहों को मिलाकर पाकिस्तान के लिए ‘ट्रिपल अटैक’ जैसी स्थिति बन गई है।
पाकिस्तान के हालात नाजुक
आर्थिक मोर्चे पर हालात पहले से ही नाजुक थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक जनवरी 2026 तक पाकिस्तान पर कुल कर्ज बढ़कर 79,322 अरब पाकिस्तानी रुपये हो गया है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के आंकड़ों के अनुसार, इसमें घरेलू कर्ज 55,978 अरब रुपये और बाहरी कर्ज 23,344 अरब रुपये तक पहुंच चुका है। यह देश की जीडीपी का लगभग 70 प्रतिशत है, जो आर्थिक संकट की गंभीरता को दर्शाता है। पाकिस्तान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मदद लेता रहा है और अब तक 26 बेलआउट पैकेज के जरिए करीब 34 अरब डॉलर की सहायता प्राप्त कर चुका है।
मिडिल ईस्ट में संघर्ष से पाकिस्तान प्रभावित
दूसरी ओर, मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने पाकिस्तान की ऊर्जा जरूरतों पर गहरा असर डाला है। तेल आयात पर निर्भर देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। हालात को संभालने के लिए सरकार ने कई सख्त कदम उठाए हैं, जिनमें सरकारी वाहनों के उपयोग में 60 प्रतिशत कटौती, मंत्रियों और सांसदों के वेतन में कमी, सरकारी खर्चों में 20 प्रतिशत कटौती और बैठकों को वर्चुअल मोड में शिफ्ट करना शामिल है।
आर्थिक विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
आर्थिक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो पाकिस्तान की जीडीपी पर 1 से 1.5 प्रतिशत तक नकारात्मक असर पड़ सकता है। वहीं, यदि कीमतें रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान देखे गए 120 डॉलर के स्तर तक पहुंचती हैं, तो महंगाई दर 30 प्रतिशत तक जा सकती है।
महंगाई के ताजा आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
महंगाई के ताजा आंकड़े भी चिंता बढ़ा रहे हैं। पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के अनुसार, 11 मार्च को समाप्त में महंगाई दर 6.44 प्रतिशत बढ़ी है। खाद्य पदार्थों से लेकर ईंधन तक की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है, जिससे आम जनता पर बोझ बढ़ा है।
अफगानिस्तान के साथ बढ़ता सीमा तनाव
इसी बीच अफगानिस्तान के साथ बढ़ते सीमा तनाव ने स्थिति और बिगाड़ दी है। 2025 के अंत से शुरू हुआ यह संघर्ष अब व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर रहा है। तोरखम और चमन जैसे प्रमुख बॉर्डर बंद होने से जरूरी सामानों की आवाजाही बाधित हुई है। खासतौर पर अफगान कोयले की आपूर्ति रुकने से पाकिस्तान के सीमेंट उद्योग पर गंभीर असर पड़ा है।
Read More:
Nepal helicopter crash: हेलीकॉप्टर लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त, काठमांडू से पांच यात्रियों को लेकर भरी थी उड़ान