प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(PM Modi) ने बुधवार को राज्यसभा में विदाई ले रहे वरिष्ठ सांसदों के सम्मान में संबोधन देते हुए कहा कि लोकतंत्र की मजबूती में अनुभवी नेताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पुरानी पीढ़ी का अनुभव देश की अमूल्य धरोहर है और नए सांसदों को इससे सीखने का हर मौका अपनाना चाहिए।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि राजनीति एक सतत यात्रा है, जहां कभी पूर्ण विराम नहीं लगता। उन्होंने कहा कि सदन में अलग-अलग मुद्दों पर बहस के दौरान हर सदस्य की अपनी खास भूमिका होती है, लेकिन ऐसे अवसर भी आते हैं जब सभी दलों से ऊपर उठकर आपसी सम्मान की भावना दिखाई देती है। विदा ले रहे सदस्यों से उन्होंने कहा कि राजनीति का कोई अंत नहीं होता।
‘संसद की सेवा में जीवन किया समर्पित’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एच. डी. देवेगौड़ा, मल्लिकार्जुन खड़गे और शरद पवार जैसे वरिष्ठ नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन हस्तियों ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा संसद की सेवा में समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि इतने लंबे अनुभव के बावजूद भी नए सांसदों के लिए उनसे सीखने के कई अवसर मौजूद हैं-चाहे वह सदन के प्रति समर्पण हो या समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का भाव।
इस दौरान पीएम मोदी ने राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह की कार्यशैली की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि हरिवंश जी ने बेहद शांत, संयमित और विनम्र तरीके से सदन का संचालन किया और अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाया।
PM ने रामदास अठावले का भी किया जिक्र
अपने भाषण में हल्के-फुल्के अंदाज़ में पीएम ने रामदास अठावले का भी जिक्र किया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि अठावले जी भले ही सदन से विदा ले रहे हों, लेकिन उनका हास्य और व्यंग्य आगे भी लोगों को सुनने को मिलता रहेगा।
प्रधानमंत्री ने अंत में विश्वास जताया कि राज्यसभा में अनुभव और ऊर्जा का यह मेल आगे भी लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करता रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि वरिष्ठ सदस्यों का मार्गदर्शन नए सांसदों को निरंतर मिलता रहेगा और यही प्रक्रिया देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को और सशक्त बनाएगी।