सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के हल्द्वानी बनभूलपुरा रेलवे जमीन अतिक्रमण मामले पर सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि रेलवे की 29 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे पर हटाया जाए। इसके लिए सर्वे 19 मार्च के बाद शुरू किया जाएगा। इस सर्वे में 4500 से ज्यादा घरों में किया जाएगा और यह तय होगा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत किसे घर देना चाहिए या नहीं।
जमीन राज्य की है – कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जमीन राज्य की है और राज्य अपने अनुसार कैसे भी जमीन का इस्तेमाल कर सकता है। साथ ही सुप्रीम कार्ट ने यह भी साफ किया कि बलभूलपुरा में पुनर्वास केंद्र बनाए जाएंगे। इसके अलावा सभी प्रभावित लोगों को सरकार हर महीने 2-2 हजार रुपये देगी।
क्या बोले CJI सूर्यकांत?
CJI सूर्यकांत ने कहा कि ‘उनसे वहीं रहने के लिए क्यों कहा जाए, जबकि बेहतर सुविधाओं वाली कोई दूसरी जगह हो सकती है। किसी भी बड़े प्रोजेक्ट के लिए दोनों तरफ खाली जगह की जरूरत होती है। वहां रहने वाले लोग यह तय नहीं कर सकते कि रेलवे को लाइन वगैरह कहां बिछानी चाहिए।’
रेलवे भूमि अतिक्रमण कानूनी विषय – SSP मंजूनाथ टीसी
नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) मंजूनाथ टीसी ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले को लेकर स्पष्ट चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह कानूनी विषय है और इसका समाधान न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा। किसी भी न्यायालय के फैसले पर अनर्गल टिप्पणी या सड़क पर प्रतिक्रिया देना स्वीकार्य नहीं होगा।
सुनवाई से पहले बढ़ी सुरक्षा
हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे भूमि पर अतिक्रमण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई प्रस्तावित है। इससे पहले हाईकोर्ट अतिक्रमण हटाने का आदेश दे चुका है, जिसके खिलाफ प्रभावित पक्ष सर्वोच्च न्यायालय पहुंचे थे। मामला पिछले दो वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और अब संभावित अंतिम निर्णय को लेकर लोगों की निगाहें अदालत पर टिकी हैं।