जम्मू में आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों और खुफिया एजेंसियों की बदली हुई रणनीति अब जमीनी स्तर पर स्पष्ट असर दिखाने लगी है। जिन आतंकियों ने वर्षों तक घने जंगलों, पहाड़ी दर्रों और दुर्गम रास्तों का सहारा लेकर मुठभेड़ों से बच निकलने की रणनीति अपनाई थी, अब वे सुरक्षाबलों की घेराबंदी से निकल नहीं पा रहे हैं।
इस नई रणनीति की रूपरेखा नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठकों में तैयार की गई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नए साल के अवसर पर राजधानी में जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति की व्यापक समीक्षा की थी। इसके बाद रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन जनवरी में दो दिवसीय दौरे पर जम्मू पहुंचे। इस दौरान उन्होंने पहली बार सभी सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के साथ संयुक्त बैठकें कर जमीनी हालात का गहन आकलन किया।
सुरक्षाबलों ने बनाई आर-पार की रणनीति
इन बैठकों में विशेष रूप से जम्मू संभाग के पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में सक्रिय आतंकियों के खिलाफ निर्णायक और आर-पार की लड़ाई की रणनीति बनाई गई। सुरक्षाबलों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि आतंकियों को किसी भी हाल में सुरक्षित पनाहगाहों तक पहुंचने का मौका न दिया जाए। नई रणनीति के लागू होते ही अभियान निर्णायक चरण में पहुंच गया और इसके परिणाम भी तेजी से सामने आने लगे।
सुरक्षाबलों को मिली बड़ी सफलता
23 जनवरी को कठुआ जिले के बिलावर क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने जैश-ए-मोहम्मद के खूंखार आतंकी जुबैर अहमद को मार गिराया। वह सैफुल्लाह ग्रुप का स्नाइपर माना जाता था। इसके बाद 4 फरवरी को उधमपुर में मुठभेड़ के दौरान जुबैर निक्कू और अबू माविया को ढेर किया गया, जबकि किश्तवाड़ के छात्रू इलाके में भी एक अन्य आतंकी मारा गया। 22 फरवरी को सुरक्षाबलों ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए सैफुल्लाह समेत तीन आतंकियों को मार गिराया, जिससे किश्तवाड़ में सक्रिय नेटवर्क को करारा झटका लगा।
बेहतर समन्वय से मिली सफलता
कठुआ से लेकर किश्तवाड़ तक सक्रिय सैफुल्लाह ग्रुप ने सुरक्षाबलों पर कई बड़े हमले किए। वर्ष 2024 में चार और 2025 में तीन मुठभेड़ों के दौरान सैफुल्लाह हर बार बच निकलने में कामयाब रहा था। लेकिन बदली रणनीति और बेहतर समन्वय के चलते अब उसकी गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया गया है।
सुरक्षाबलों की ताजा कार्रवाई से साफ है कि अब जम्मू में आतंकवाद के खिलाफ अभियान केवल जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। लगातार मिल रही सफलताओं ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में क्षेत्र में सक्रिय आतंकी ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त करने के प्रयास और तेज होंगे।