कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जाति जनगणना के मुद्दे पर अपनी चिंताएं और सुझाव साझा किए। उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना सामाजिक और आर्थिक न्याय के लिए जरूरी है और इसे विभाजनकारी नहीं माना जाना चाहिए। साथ ही खरगे ने यह भी लिखा कि उन्होंने 2023 में भी इस विषय पर पत्र लिखा था, लेकिन उसका आज तक कोई जवाब नहीं मिला है।
मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी को इस विषय पर पत्र लिख कर तीन सुझाव भी दिए हैं जो कि निम्नलिखित हैं
1. जनगणना की प्रश्नावली का डिजाइन ऐसा हो कि जाति संबंधी जानकारी केवल गिनती के लिए नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों के लिए एकत्र की जाए। इसके लिए तेलंगाना मॉडल अपनाने की सलाह दी गई।
2. जातिगत जनगणना के नतीजों के आधार पर आरक्षण की 50% सीमा को हटाने की मांग की, ताकि सभी वर्गों को न्याय मिल सके।
3. सभी राजनीतिक दलों से संवाद कर इस प्रक्रिया को पारदर्शी और सर्वमान्य बनाने का आग्रह किया।
मल्लिकार्जुन खरगे ने पत्र में यह भी कहा कि जाति जनगणना के आंकड़े पूरी तरह से सार्वजनिक किए जाएं और सामाजिक-आर्थिक प्रगति का भी आंकलन किया जाए।

