सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने भारतीय राजनीति में एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। वह LGBTQ+ समुदाय से आने वाली पहली सांसद बन गई हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की उम्मीदवार के रूप में उन्हें राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुना गया।
निर्विरोध चुनाव में दर्ज हुआ नाम
राज्यसभा की 37 सीटों में से 26 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए, जिनमें मेनका गुरुस्वामी का नाम भी शामिल है। शेष 11 सीटों पर सोमवार और मंगलवार को चुनाव संपन्न हुए।
कौन हैं मेनका गुरुस्वामी
51 वर्षीय मेनका गुरुस्वामी एक प्रतिष्ठित संवैधानिक वकील हैं। उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, हार्वर्ड लॉ स्कूल और नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की है। वह लंबे समय से संवैधानिक मूल्यों, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की मुखर आवाज रही हैं।
ऐतिहासिक धारा 377 केस से जुड़ी भूमिका
गुरुस्वामी अपनी साथी अरुंधती काटजू के साथ उस ऐतिहासिक मुकदमे का हिस्सा रही हैं, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में 158 साल पुराने कानून (धारा 377) को खत्म किया था। इस फैसले ने समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर LGBTQ+ समुदाय को बड़ी राहत दी थी।
संसद में समानता के मुद्दे उठाने का संकल्प
गुरुस्वामी ने कहा कि संविधान के ‘समानता, भाईचारा और भेदभाव रहित व्यवहार’ जैसे मूल्य उनके काम का आधार रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि वह राज्यसभा में भी इन आदर्शों को आगे बढ़ाते हुए पश्चिम बंगाल के लोगों की आवाज बनेंगी।
TMC की रणनीति का हिस्सा
पार्टी सूत्रों के अनुसार, गुरुस्वामी का चयन तृणमूल कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें शिक्षित और संवैधानिक समझ रखने वाले लोगों को संसद में भेजा जा रहा है। उनके चुने जाने के बाद TMC के 13 राज्यसभा सदस्यों में से 5 महिलाएं हो गई हैं। तृणमूल कांग्रेस की ओर से बाबुल सुप्रियो, राजीव कुमार और अभिनेत्री कोयल मलिक भी राज्यसभा के लिए चुने गए हैं। मेनका गुरुस्वामी का राज्यसभा पहुंचना भारतीय लोकतंत्र में विविधता और समावेशिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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