अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर गठित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में भारत ने गुरुवार (19 फरवरी) को पर्यवेक्षक देश के रूप में हिस्सा लिया। वॉशिंगटन डीसी स्थित यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस में आयोजित इस बैठक में भारतीय दूतावास में तैनात चार्ज डी’ अफेयर्स नामग्या सी खम्पा ने भारत का प्रतिनिधित्व किया।
यह भागीदारी उस निमंत्रण के एक सप्ताह बाद हुई है, जिसमें अमेरिका ने भारत को इस बोर्ड से जुड़ने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि भारत ने अभी तक पूर्ण सदस्यता को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है।
UN के समानांतर नई पहल
राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले महीने दावोस में विश्व आर्थिक मंच के दौरान इस बोर्ड की रूपरेखा प्रस्तुत की थी। उन्होंने इसे एक ऐसे मंच के रूप में पेश किया जो संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्थाओं को चुनौती दे सकता है। प्रारंभिक रूप से इस बोर्ड का उद्देश्य गाजा में इजरायल-हमास युद्धविराम की निगरानी और संभावित प्रशासनिक भूमिका निभाना बताया गया था।
कौन हैं नामग्या सी. खम्पा ?
विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, नामग्या सी. खम्पा वर्ष 2000 बैच की भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी हैं। फरवरी 2026 से वह वॉशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास में चार्ज डी’अफेयर्स (Cd’A) और डिप्टी चीफ ऑफ मिशन के पद पर तैनात हैं। इस जिम्मेदारी के तहत वह राजदूत की अनुपस्थिति में दूतावास का नेतृत्व करती हैं और भारत-अमेरिका के बीच प्रमुख कूटनीतिक मामलों की निगरानी करती हैं। अपने करियर में उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण राजनयिक दायित्व निभाए हैं और भारत की विदेश नीति से जुड़े अहम मोर्चों पर काम किया है।
50 देशों की भागीदारी
बैठक में लगभग 50 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। 27 देश बोर्ड के सदस्य हैं, जिनमें अजरबैजान, मिस्र, हंगरी, इंडोनेशिया, इजराइल, जॉर्डन, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, तुर्किये और यूएई जैसे देश शामिल हैं। भारत और यूरोपीय संघ सहित कुछ अन्य देशों ने पर्यवेक्षक के रूप में भाग लिया।
ट्रंप की घोषणा
बैठक में ट्रंप ने बताया कि नौ सदस्य देशों ने गाजा राहत पैकेज के लिए 7 अरब डॉलर देने पर सहमति जताई है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका 10 अरब डॉलर का योगदान देगा, हालांकि खर्च के विवरण स्पष्ट नहीं किए गए।
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