स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तीन माल वाहक जहाजों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। साथ ही ईरानी तेल निर्यात से जुड़ी छूट भी वापस ले ली गई है। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई क्षेत्रीय सुरक्षा और युद्धविराम के कथित उल्लंघन के जवाब में की गई है, जबकि ईरान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अमेरिकी हमले को समझौते का उल्लंघन बताया है।
होर्मुज हमले के बाद अमेरिका की सैन्य कार्रवाई
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तीन माल वाहक जहाजों पर हुए हमलों के बाद पश्चिम एशिया में हालात फिर से तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिकी सैन्य कमान (CENTCOM) के अनुसार, ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय निगरानी केंद्र, मिसाइल सिस्टम और ड्रोन लॉन्च साइटों को निशाना बनाकर हवाई हमले किए गए। ईरानी मीडिया ने बंदर अब्बास, सीरिक और क़ेश्म द्वीप के आसपास कई विस्फोटों की जानकारी दी है। जबकि, ईरान ने जहाजों पर हमले में किसी भी तरह की गतिविधि से इनकार किया है और कहा है कि वह युद्धविराम समझौते का पालन कर रहा है।
तेल निर्यात पर सख्ती और वैश्विक बाजार पर असर
अमेरिका ने जून में दी गई वह छूट भी समाप्त कर दी है, जिसके तहत ईरान सीमित रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पाद बेच सकता था। नई व्यवस्था के तहत ईरान को निर्धारित समय सीमा तक ऐसे सभी सौदों को बंद करना होगा। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तीन प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल बाजार पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
ट्रंप का कड़ा संदेश, ईरान की चेतावनी और आगे की चुनौती
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि ईरान को समझौते की राह अपनानी होगी, नहीं तो अमेरिका अपनी कार्रवाई जारी रखेगा। वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी हमलों को युद्धविराम समझौते का उल्लंघन बताते हुए चेतावनी दी कि देश अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि सैन्य अभियान आगे भी जारी रह सकता है। वहीं कुछ रिपोर्टों में यह आशंका भी जताई गई है कि ईरान खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों या हितों को निशाना बना सकता है। इस तरह की संभावित जवाबी कार्रवाई की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे क्षेत्र की स्थिति पर दुनिया की नजर बनी हुई है।
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