अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल को बड़ा आर्थिक फैसला लेते हुए दवाइयों और धातुओं पर नए टैरिफ लगाने का आदेश दिया है। यह घोषणा उस ‘लिबरेशन डे’ के ठीक एक साल बाद की गई है, जब अमेरिका ने कई देशों के साथ ट्रेड वॉर की शुरुआत की थी। इस कदम को ट्रंप के आक्रामक व्यापार एजेंडे का हिस्सा माना जा रहा है।
विदेशी दवाओं पर 100% टैरिफ लागू
नए आदेश के तहत विदेशों में बनी पेटेंट दवाओं पर 100 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा। हालांकि, यह राहत भी दी गई है कि अगर कोई देश अमेरिका के साथ नया व्यापार समझौता करता है या कंपनियां अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने का वादा करती हैं, तो टैरिफ में कमी की जा सकती है।
कंपनियों को दिया गया समय
व्हाइट हाउस के मुताबिक, बड़ी फार्मा कंपनियों को 120 दिन और छोटी कंपनियों को 180 दिन का समय दिया गया है, ताकि वे अमेरिका में उत्पादन शुरू करने की योजना पेश कर सकें। जो कंपनियां अमेरिका में फैक्ट्री लगाने के लिए तैयार होंगी, उनके लिए टैरिफ घटाकर 20 प्रतिशत किया जा सकता है।
महंगाई बढ़ने की आशंका
इस फैसले के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि उपभोक्ताओं के लिए सामान महंगा हो सकता है। खासकर दवाइयों और मेटल से बने उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। ट्रंप का यह कदम अमेरिकी कंपनियों को देश में ही उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित करने की रणनीति का हिस्सा है। सरकार चाहती है कि विदेशी निर्भरता कम हो और घरेलू उद्योग को मजबूती मिले।
वैश्विक व्यापार पर पड़ेगा असर
इस नए टैरिफ फैसले का असर वैश्विक व्यापार पर भी देखने को मिल सकता है। कई देश अमेरिका के इस कदम का विरोध कर सकते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों में तनाव बढ़ने की आशंका है।
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