TCS Nashik Conversion Case: TCS से जुड़े यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण मामले में महाराष्ट्र के नासिक की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वी.वी. कथारे ने कंपनी की साइट हेड और POSH कमेटी सदस्य अश्विनी चैनानी समेत पांच आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने माना कि पीड़िता की शिकायतों को नजरअंदाज कर आरोपियों को गलत तरह से रखा गया है।
POSH कमेटी की भूमिका पर उठे सवाल
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अश्विनी चैनानी, जो कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए बनी आंतरिक समिति (POSH कमेटी) की सदस्य थीं, उन्होंने पीड़िता की मौखिक शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। कोर्ट के अनुसार उन्होंने शिकायत को लिखित रूप में दर्ज कराने में भी मदद नहीं की, जबकि कानून के तहत यह उनकी जिम्मेदारी थी। कोर्ट ने कहा कि चैनानी की चुप्पी और असंवेदनशीलता ने ऑफिस में टॉक्सिक माहौल को बढ़ावा दिया। आदेश में यह भी कहा गया कि उन्होंने पीड़िता को ही बेवजह सुर्खियों में आने वाली बताकर आरोपी को माफ करने की सलाह दी थी। अदालत ने इसे आरोपी कर्मचारियों को पनाह देने जैसा माना है।
इन आरोपियों को भी नहीं मिली राहत
अदालत ने इस मामले में तौसीफ अत्तार, रज़ा मेमन, शाहरुख कुरैशी और आसिफ अंसारी की जमानत याचिकाएं भी खारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आरोपियों का प्रभावशाली होना गवाहों और सबूतों को प्रभावित कर सकता है।
FIR में गंभीर आरोप
एफआईआर के मुताबिक रजा मेमन और शाहरुख कुरैशी ने पीड़िता से नजदीकियां बढ़ाने के लिए वर्ड पजल का सहारा लिया था। इसके बाद उससे निजी और शर्मिंदा करने वाले सवाल पूछे गए। पीड़िता ने आरोप लगाया कि उस पर लगातार अश्लील कमैंट्स किए जाते थे, जिससे ऑफिस का माहौल बेहद खराब हो गया था।
नौकरी छोड़ने तक पहुंची पीड़िता
मामले में बताया गया कि लगातार मानसिक प्रताड़ना और उत्पीड़न से परेशान होकर पीड़िता ने मार्च 2026 में इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। अदालत ने कहा कि शिकायत दर्ज कराने में देरी को पीड़िता के खिलाफ नहीं माना जा सकता, क्योंकि उसने पहले ही POSH कमेटी सदस्य को घटनाओं की जानकारी दे दी थी।
बचाव पक्ष ने क्या दलील दी?
बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत में कहा कि अश्विनी चैनानी मुख्य रूप से पुणे शाखा से काम करती थीं और नासिक यूनिट के रोजमर्रा के मामलों की सीधी निगरानी नहीं करती थीं। उन्होंने यह भी दलील दी कि पीड़िता की ओर से कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई थी, इसलिए औपचारिक प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। हालांकि कोर्ट ने इस दलील को सही नहीं माना।
धर्मांतरण के आरोपों की भी जांच
नासिक पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) फिलहाल IT कंपनी की नासिक यूनिट में सामने आए 9 मामलों की जांच कर रही है। कुछ पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि उन पर इस्लामिक तौर-तरीके अपनाने का दबाव बनाया गया। आरोपों में नमाज पढ़ने, खानपान बदलने और धार्मिक प्रतीक अपनाने के लिए मजबूर करने जैसी बातें शामिल हैं।
जांच प्रभावित होने की आशंका
कोर्ट ने साफ कहा कि अगर आरोपियों को जमानत दी जाती है तो गवाहों को प्रभावित करने और सबूतों से छेड़छाड़ की संभावना बढ़ सकती है। इसी आधार पर अदालत ने सभी आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
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