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करोड़ों की कमाई पर भी ₹0 इनकम टैक्स! भारत का यह राज्य क्यों कहलाता है ‘टैक्स हेवन’? जानिए पूरा नियम

Tax-free State: नई टैक्स रिजीम के तहत अब 12 लाख रुपये तक की सालाना आय पर इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता। इससे अधिक सैलरी होने पर निर्धारित स्लैब के अनुसार टैक्स देना होता है। हालांकि, भारत में एक ऐसा राज्य भी है जहां यह सामान्य नियम सभी पर लागू नहीं होता। सिक्किम के ज्यादातर मूल निवासियों को उनकी कमाई चाहे करोड़ों या अरबों रुपये ही क्यों न हो, इनकम टैक्स से पूरी छूट मिली हुई है। इसी विशेष व्यवस्था के कारण सिक्किम को भारत का ‘टैक्स हेवन’ भी कहा जाता है।

इतिहास से जुड़ी है टैक्स छूट की वजह

सिक्किम में इनकम टैक्स छूट की व्यवस्था का इतिहास वर्ष 1948 से जुड़ा हुआ है। उस समय सिक्किम के चोग्याल शासक ने एक इनकम टैक्स मैनुअल लागू किया था, जिसके तहत राज्य के लोगों से इनकम टैक्स नहीं लिया जाता था। बाद में वर्ष 1975 में जब सिक्किम का भारत में पूर्ण विलय हुआ, तब यह शर्त रखी गई कि वहां के मूल निवासियों को मिलने वाली यह टैक्स छूट जारी रहेगी। भारत सरकार ने इस व्यवस्था को स्वीकार किया और संविधान के आर्टिकल 371-एफ के तहत सिक्किम को विशेष दर्जा दिया गया।

कानून में कैसे मिली यह छूट?

सिक्किम के मूल निवासियों को मिलने वाली टैक्स छूट आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10 (26AAA) के तहत दी गई है। इस प्रावधान के अनुसार वहां के निवासी अपनी कमाई पर इनकम टैक्स देने से मुक्त हैं। यही कारण है कि राज्य के अधिकांश स्थानीय लोगों पर सामान्य आयकर नियम लागू नहीं होते।

95% आबादी को मिलता है लाभ

शुरुआत में केवल उन लोगों को मूल निवासी माना जाता था जिनके पास सिक्किम सब्जेक्ट सर्टिफिकेट था। ऐसे लोगों को ही इनकम टैक्स से छूट मिलती थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद इस दायरे का विस्तार हुआ। अदालत ने कहा कि 26 अप्रैल 1975 यानी भारत में विलय से ठीक एक दिन पहले तक, सिक्किम में बस चुके भारतीय मूल के लोग भी वहां के मूल निवासी माने जाएंगे। इसके बाद राज्य की करीब 95% आबादी इनकम टैक्स छूट के दायरे में आ गई।

छूट पर उठ रहे हैं सवाल

सिक्किम को मिली इस खास टैक्स व्यवस्था को लेकर अब बहस भी तेज हो रही है। कुछ पक्षों का आरोप है कि बाहरी लोग भी टैक्स बचाने के उद्देश्य से इस व्यवस्था का गलत फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी वजह से इस विशेष छूट की समीक्षा और इसे समाप्त करने की मांग समय-समय पर उठती रही है। फिलहाल, कानून के तहत मूल निवासियों को यह टैक्स छूट पहले की तरह जारी है।

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Yogita Tyagi
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योगिता त्यागी एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, मनोरंजन, धर्म और लाइफस्टाइल विषयों में विशेष रुचि है। वर्तमान में वह Mhone News के राजनीतिक, धर्म और मनोरंजन सेक्शन के लिए सक्रिय रूप से लेखन कर रही हैं। डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने अपने करियर में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों- जैसे दैनिक भास्कर, पंजाब केसरी, इंडिया डेली लाइव और ITV नेटवर्क में योगदान दिया है। योगिता ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU) से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है, जिसने उनके डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में गहन, प्रभावशाली और विश्वसनीय लेखन की मजबूत नींव रखी है।
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