अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में एक बड़ा मोड़ आया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने गुरुवार को इस मामले में औपचारिक रूप से एफआईआर (FIR) दर्ज करा दी है। इस बड़ी कानूनी कार्रवाई में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर समेत कुल आठ लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इनमें से तीन आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार भी कर लिया है। यह कदम स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की शुरुआती जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद उठाया गया है, जिसने मंदिर के चढ़ावे में बड़ी हेराफेरी का खुलासा किया है।
चंपत राय के इस्तीफे की अफवाहें खारिज
इस पूरे विवाद के बीच राम मंदिर ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं बाजार में गर्म थीं। शुरुआत में ऐसी खबरें उड़ रही थीं कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इस मामले के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, राम मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव ने इन सभी दावों को पूरी तरह से खारिज करते हुए इसे महज एक अफवाह करार दिया है। इस मामले में दर्ज कराई गई एफआईआर में चंपत राय या ट्रस्ट के किसी भी अन्य शीर्ष पदाधिकारी का नाम शामिल नहीं किया गया है। ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट को आधार बनाते हुए यह मुकदमा दर्ज कराया है, जिससे बड़े चेहरों को फिलहाल इस कानूनी कार्रवाई से बाहर रखा गया है।
तीन आरोपी धरे गए, चार टीमें कर रही हैं छापेमारी
पुलिस ने एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद आरोपियों की धरपकड़ शुरू कर दी है। नामजद किए गए आठ आरोपियों में से तीन, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा को पुलिस हिरासत में ले लिया गया है। वहीं, मामले के बाकी पांच आरोपियोंअविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और करुणेश पांडेय की तलाश के लिए पुलिस की चार विशेष टीमें बनाई गई हैं, जो लगातार संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।
चाबियों के राज और सेवादारों की बदलती किस्मत से खुला खेल
चढ़ावा चोरी के इस पूरे खेल का पर्दाफाश करने के लिए सरकार ने बीते 13 जून को एक एसआईटी का गठन किया था, जिसने 23 जून को अपनी शुरुआती रिपोर्ट सरकार को सौंपी। जांच के दौरान एसआईटी को पता चला कि मंदिर के मुख्य दानपात्रों की चाबियां चंपत राय के ड्राइवर टिन्नू के पास ही रहती थीं। इसके साथ ही जांच टीम ने मंदिर परिसर में तैनात करीब 150 ऐसे सेवादारों और कर्मचारियों की पहचान की है, जिनकी आर्थिक स्थिति में 22 जनवरी 2024 को हुई रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अचानक जादुई रूप से बड़ा उछाल आया था।
पहले बड़े अफसरों पर भी था एफआईआर का साया
इस एफआईआर से पहले सूत्रों के हवाले से बेहद चौंकाने वाली जानकारी सामने आ रही थी। बताया जा रहा था कि एसआईटी ने अपनी आंतरिक जांच रिपोर्ट में चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और निर्माण प्रभारी गोपाल राव सहित कुल 17 लोगों को इस पूरे घोटाले का जिम्मेदार माना था। उस समय इन सभी बड़े नामों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना पूरी तरह तय माना जा रहा था, लेकिन गुरुवार को दर्ज हुई अंतिम एफआईआर में केवल छोटे कर्मचारियों और सेवादारों को ही आरोपी बनाया गया है।
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