देश में नए लेबर कोड लागू होने के साथ ही नौकरीपेशा लोगों के लिए कई बड़े बदलाव शुरू हो गए हैं। नए वित्त वर्ष से कर्मचारियों की सैलरी स्ट्रक्चर, छुट्टी के नियम और वर्किंग आवर्स पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
4 नए लेबर कोड लागू
केंद्र सरकार ने 40 से ज्यादा पुराने श्रम कानूनों को खत्म कर चार नए लेबर कोड लागू किए हैं। इन्हें पहले ही नोटिफाई किया जा चुका था और अब कंपनियों को इन्हीं के अनुसार काम करना होगा। इससे कर्मचारियों के अधिकारों और कंपनियों की जिम्मेदारियों में स्पष्टता आएगी।
छुट्टी के नियमों में बड़ा बदलाव
नए नियम के अनुसार अब कर्मचारी केवल 30 दिन तक ही अर्जित छुट्टी कैरी फॉरवर्ड कर सकेंगे। इससे अधिक बची छुट्टियों का उसी साल निपटारा करना होगा, ताकि छुट्टियां बेकार न जाएं और कर्मचारी उनका सही उपयोग कर सकें।
लीव इनकैशमेंट हुआ अनिवार्य
अब 30 दिन से ज्यादा बची छुट्टियों का इनकैशमेंट करना कंपनियों के लिए जरूरी होगा। यानी अतिरिक्त छुट्टियों के बदले कर्मचारियों को पैसा मिलेगा। इससे कर्मचारियों को आर्थिक लाभ भी मिलेगा और छुट्टी का नुकसान नहीं होगा।
खास स्थिति में मिलेगी राहत
अगर किसी कर्मचारी की छुट्टी कंपनी काम के दबाव के कारण मंजूर नहीं करती है, तो ऐसी स्थिति में वह छुट्टी बिना किसी सीमा के आगे कैरी फॉरवर्ड की जा सकेगी। यह नियम कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा के लिए जोड़ा गया है। हालांकि रोजाना 8 घंटे और हफ्ते में 48 घंटे काम का नियम बरकरार है, लेकिन अब कंपनियां कर्मचारियों को ज्यादा फ्लेक्सिबल वर्किंग ऑप्शन दे सकेंगी। इससे वर्क-लाइफ बैलेंस बेहतर होने की उम्मीद है।
ओवरटाइम से बढ़ेगी आमदनी
नए लेबर कोड के तहत ओवरटाइम के अवसर भी बढ़ेंगे। कर्मचारी अब पहले से ज्यादा ओवरटाइम कर सकेंगे, जिससे उनकी अतिरिक्त कमाई का रास्ता भी खुलेगा।
कर्मचारियों के लिए क्या मायने?
इन बदलावों का असर सीधे कर्मचारियों की सैलरी, पीएफ योगदान, छुट्टियों और काम के तरीके पर पड़ेगा। कुल मिलाकर नए लेबर कोड्स को कर्मचारियों के हित और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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