Tuesday, February 10, 2026
HomeCurrent Newsन पुतिन, न ट्रंप, EU के दो शीर्ष नेता होंगे गणतंत्र दिवस...

न पुतिन, न ट्रंप, EU के दो शीर्ष नेता होंगे गणतंत्र दिवस के चीफ गेस्ट, भारत का बड़ा कूटनीतिक संदेश  

भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर इस बार परंपरा से हटकर एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। न रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और न ही अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप… इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपीय संघ (EU) के दो शीर्ष नेताओं को एक साथ चीफ गेस्ट के रूप में आमंत्रित किया है। एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के नाम इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में हैं।

यह पहली बार है जब भारत ने किसी एक देश के नेता के बजाय किसी बहुपक्षीय संगठन के दो शीर्ष प्रतिनिधियों को एक साथ गणतंत्र दिवस का मुख्य अतिथि बनाया है। कूटनीतिक हलकों में इस फैसले को भारत की बदलती वैश्विक रणनीति का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।

बदलते वैश्विक समीकरणों में भारत का दांव
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक यह न्योता ऐसे समय में दिया गया है जब वैश्विक राजनीति तेज़ी से करवट ले रही है। अमेरिका और यूरोप के बीच रिश्तों में तनाव के संकेत मिल रहे हैं और ट्रांसअटलांटिक साझेदारी में भरोसे की दरार खुलकर सामने आ रही है। ऐसे माहौल में भारत और यूरोपीय संघ के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं।

भारत–EU साझेदारी नए दौर में
भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर बातचीत निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। इसके अलावा रक्षा, सुरक्षा सहयोग, क्लीन एनर्जी, टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन जैसे अहम क्षेत्रों में दोनों पक्षों के बीच साझेदारी गहरी हो रही है। ऐसे में EU के दो शीर्ष नेताओं को एक साथ आमंत्रित करना भारत की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें वह यूरोप को अपने दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहा है।

कूटनीतिक इतिहास में नया अध्याय
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल एक प्रतीकात्मक कदम नहीं है, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन के बीच भारत की स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति का संदेश भी देता है। गणतंत्र दिवस के मंच से भारत यह साफ कर रहा है कि वह उभरती वैश्विक व्यवस्था में यूरोपीय संघ के साथ मिलकर नई संभावनाओं को आकार देना चाहता है।
कुल मिलाकर, 77वें गणतंत्र दिवस पर EU के दो शीर्ष नेताओं की मौजूदगी भारत के कूटनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रही है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments