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केरल में AI वीडियो पर बड़ा एक्शन, PM मोदी और चुनाव आयोग की छवि से छेड़छाड़ पर ‘X’ समेत कई पर केस

Kerala AI Video Controversy: केरल के तिरुवनंतपुरम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाए गए एक वीडियो को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस वीडियो में देश के प्रधानमंत्री और Election Commission of India को कथित तौर पर भ्रामक और आपत्तिजनक तरीके से पेश किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए केरल पुलिस की साइबर विंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और एक यूजर हैंडल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

मामला साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज

पुलिस के अनुसार, यह मामला तिरुवनंतपुरम सिटी के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ है। शुरुआती जांच में सामने आया कि करीब 1 मिनट 17 सेकंड का यह वीडियो AI तकनीक की मदद से तैयार किया गया था और इसे इस तरह से बनाया गया था कि आम लोगों को गुमराह किया जा सके। पुलिस का कहना है कि इस तरह का कंटेंट चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकता है और इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।

वीडियो में चुनाव आयोग के कथित पत्र का जिक्र 

जांच में यह भी सामने आया कि वीडियो में चुनाव आयोग के एक कथित पत्र का जिक्र किया गया था, जिस पर भारतीय जनता पार्टी के केरल यूनिट की मुहर दिखाई गई। इस पहलू ने मामले को और संवेदनशील बना दिया, क्योंकि चुनाव के दौरान इस तरह की सामग्री मतदाताओं की सोच को प्रभावित कर सकती है। पुलिस ने इसे गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू की।

निर्देश के बाद भी नहीं हटाया गया कंटेंट 

अधिकारियों का कहना है कि जिस X अकाउंट से यह वीडियो पोस्ट किया गया था, वहां से इसे अब तक हटाया नहीं गया था, जबकि प्लेटफॉर्म को कंटेंट हटाने के निर्देश दिए जा चुके थे। पुलिस का आरोप है कि वीडियो हटाने में देरी के कारण यह तेजी से फैलता गया, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। इसी आधार पर प्लेटफॉर्म को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया है।

केस में मामला दर्ज 

इस केस में ‘Laxmi N Raju (@valiant_Raju)’ नाम के अकाउंट समेत अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वीडियो किसने तैयार किया और इसके पीछे क्या मंशा थी। जांच के दौरान तकनीकी पहलुओं की भी गहन पड़ताल की जा रही है। एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत दर्ज की गई है। इनमें धारा 352 (जानबूझकर अपमान), 336 (जालसाजी), 353 (सार्वजनिक उपद्रव फैलाने वाले बयान), 3(5) (सामूहिक इरादा) और 174 (चुनाव में अनुचित प्रभाव) शामिल हैं। इसके अलावा आईटी एक्ट की धारा 66 C (पहचान की चोरी) भी लगाई गई है। पुलिस ने बताया कि प्लेटफॉर्म को कानूनी नोटिस भेजकर इस अवैध कंटेंट को हटाने के निर्देश दिए गए हैं और मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के तहत भी आवश्यक कदम उठाए गए हैं।

सोशल मीडिया पर उठाया गया मुद्दा 

इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब Communist Party of India (Marxist) ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाया। पार्टी ने 19 मार्च 2019 के एक पत्र से जुड़ा हलफनामा साझा किया, जिसमें चुनाव आयोग की जगह बीजेपी के केरल यूनिट की मुहर होने का दावा किया गया था। इसके बाद यह मामला तेजी से राजनीतिक बहस का विषय बन गया।

इलेक्शन कमीशन ने दी सफाई

हालांकि, Election Commission of India ने इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए इसे ‘क्लेरिकल एरर’ बताया और कहा कि गलती को तुरंत ठीक कर लिया गया था। आयोग ने यह भी जानकारी दी कि इस त्रुटि के लिए जिम्मेदार अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है।

पुलिस ने लोगों से की खास अपील

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि चुनाव के दौरान किसी भी अपुष्ट या भ्रामक जानकारी को साझा करने से बचें। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की सामग्री न केवल समाज में भ्रम फैलाती है, बल्कि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और शांति व्यवस्था के लिए भी खतरा बन सकती है।

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