अंतरराष्ट्रीय योग दिवस(Yoga Day) के अवसर पर 21 जून को कोलकाता एक भव्य और ऐतिहासिक आयोजन का गवाह बनने जा रहा है। इस बार शहर में योग दिवस का उत्सव विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रहेगा क्योंकि हुगली नदी में सैकड़ों नावों पर एक साथ योगाभ्यास कराने की तैयारी की गई है। आयोजकों को उम्मीद है कि यह अनूठा आयोजन एक नया रिकॉर्ड स्थापित कर सकता है और देशभर का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करेगा।
500 से अधिक नावों पर एक साथ होगा योग प्रदर्शन
जानकारी के अनुसार, बाबूघाट के आसपास हुगली नदी में 500 से अधिक नावों को एक साथ एकत्रित कर योग प्रदर्शन कराया जाएगा। इन नावों में पर्यटन और यात्री सेवाओं से जुड़ी कई नौकाएं शामिल होंगी। नदी के बीच आयोजित होने वाला यह सामूहिक योग कार्यक्रम कोलकाता में होने वाले मुख्य समारोह का हिस्सा होगा जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे।
रेड रोड में आयोजित होगा योग का मुख्य कार्यक्रम
योग दिवस के मुख्य कार्यक्रम का आयोजन कोलकाता के रेड रोड क्षेत्र में किया जाएगा। यहां हजारों लोग एक साथ योगाभ्यास करेंगे। अनुमान है कि 35 हजार से अधिक प्रतिभागी इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे जिससे यह देश के सबसे बड़े योग आयोजनों में से एक बन सकता है।
इस विशेष आयोजन को सफल बनाने के लिए प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। कार्यक्रम के दौरान नौकाओं की सुचारू व्यवस्था और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुंदरबन क्षेत्र में कुछ पर्यटन गतिविधियों को अस्थायी रूप से सीमित किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इससे आयोजन के संचालन में सुविधा होगी और प्रतिभागियों को बेहतर अनुभव मिल सकेगा।
नदी पर योग प्रदर्शन का एक अनूठा दृश्य
इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम स्वस्थ जीवनशैली और सभी आयु वर्ग के लोगों की भागीदारी को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। आयोजकों का कहना है कि नदी पर आयोजित योग प्रदर्शन न केवल एक अनूठा दृश्य प्रस्तुत करेगा बल्कि योग के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राज्य प्रशासन ने भी इस आयोजन को लेकर उत्साह व्यक्त किया है।
अधिकारियों के अनुसार, पहली बार पश्चिम बंगाल सरकार इस स्तर पर योग दिवस कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभा रही है। उनका मानना है कि प्रधानमंत्री की उपस्थिति और बड़ी जनभागीदारी के कारण यह आयोजन कई नए कीर्तिमान स्थापित कर सकता है। कोलकाता में होने वाला यह भव्य आयोजन योग के वैश्विक संदेश को मजबूत करने के साथ-साथ भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भी नई पहचान देने का काम करेगा।