Saturday, March 7, 2026
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मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच भारत सरकार सतर्क, तेल कंपनियों को LPG उत्पादन बढ़ाने का दिया आदेश

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मिडिल ईस्ट में जारी संकट के कारण गैस सप्लाई प्रभावित होने की आशंका के बीच भारत सरकार ने आपात अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए तेल रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति में किसी तरह की कमी न हो।

भारत दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक है। पिछले साल देश में करीब 33.15 मिलियन मीट्रिक टन कुकिंग गैस की खपत हुई थी। LPG मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन गैस के मिश्रण से बनती है। भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग दो-तिहाई हिस्सा आयात से पूरा करता है, जिसमें से करीब 85 से 90 प्रतिशत सप्लाई मिडिल ईस्ट देशों से आती है।

रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश

सरकार के आदेश के मुताबिक सभी तेल रिफाइनरियों को अपने पास मौजूद प्रोपेन और ब्यूटेन का अधिकतम उपयोग LPG बनाने में करने के लिए कहा गया है। साथ ही गैस उत्पादकों को निर्देश दिया गया है कि वे इन गैसों की आपूर्ति सरकारी रिफाइनरियों को प्राथमिकता दें, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं तक गैस की नियमित सप्लाई बनी रहे।

सरकारी तेल कंपनियों को मिलेगी प्राथमिकता

सरकार ने स्पष्ट किया है कि LPG की आपूर्ति मुख्य रूप से इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) को दी जाएगी। यही कंपनियां देशभर में रसोई गैस की सप्लाई करती हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में फिलहाल करीब 33.2 करोड़ सक्रिय LPG उपभोक्ता हैं।

पेट्रोकेमिकल सेक्टर पर पड़ सकता है असर

प्रोपेन और ब्यूटेन को LPG उत्पादन में लगाने से कुछ पेट्रोकेमिकल उत्पादों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इनमें अल्काइलेट्स जैसे उत्पाद शामिल हैं, जिन्हें पेट्रोल में मिलाया जाता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियां हर महीने अल्काइलेट्स के कई कार्गो निर्यात करती रही हैं, इसलिए उत्पादन में कमी से उनके कारोबार पर असर पड़ने की आशंका है।

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