Wednesday, February 11, 2026
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श्री आनंदपुर साहिब में श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस पर भव्य समागम

श्री आनंदपुर साहिब में इस वर्ष एक विशेष आध्यात्मिक और सांस्कृतिक माहौल देखने को मिल रहा है। श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में तीन दिवसीय भव्य समागम का आयोजन किया जा रहा है। यह समागम ना केवल सिख इतिहास और संस्कृति का प्रतीक है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को वीरता, त्याग और आध्यात्मिक मूल्यों से रूबरू कराने का भी एक अनूठा प्रयास है।

विविध कार्यक्रम

समागम के दौरान श्रद्धालुओं और आगंतुकों को कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का अनुभव होगा, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं-

  • अखंड पाठ साहिब: गुरु की महिमा और उपदेशों का निरंतर पाठ, जो आध्यात्मिक माहौल को गहराई प्रदान करेगा।

  • प्रदर्शनी: सिख इतिहास, कला और विरासत को दर्शाती विशेष प्रदर्शनी, जो सभी के लिए ज्ञानवर्धक होगी।

  • नगर कीर्तन: कीर्तन के स्वर और भक्तिमय के माहौल के साथ शहरभर में निकाला जाएगा नगर कीर्तन।

  • हेरिटेज वॉक: युवा और पर्यटकों को सिख इतिहास से जोड़ने का एक प्रेरक प्रयास।

  • विधानसभा सत्र और सांस्कृतिक कार्यक्रम: जिसमें सिख पंथ की गौरवशाली परंपराओं पर प्रकाश डाला जाएगा।

  • ड्रोन शो: तकनीक और संस्कृति का अद्भुत संगम दिखाता आकर्षक ड्रोन शो।

श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएँ

श्रद्धालुओं की सुविधा के मद्देनज़र प्रशासन ने अत्यंत व्यवस्थित और आधुनिक प्रबंध किए हैं-

  • 10,000 क्षमता वाली टेंट सिटी तैयार की गई है, ताकि बड़ी संख्या में श्रद्धालु ठहर सकें।

  • 500 ई-रिक्शा और शटल बसें परिवहन व्यवस्था को आसान बनाएंगी।

  • 30 आधुनिक पार्किंग स्थल भी विकसित किए गए हैं, जिससे यातायात सुचारू रहे।

सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम

इतने विशाल आयोजन को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी व्यापक स्तर पर की गई है-

  • 500 CCTV कैमरों से पूरे क्षेत्र की निगरानी की जा रही है।

  • 8,000 से अधिक पुलिस कर्मियों की तैनाती से श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।

सिख विरासत का गौरवपूर्ण उत्सव

यह समागम सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सिख इतिहास में अमर शहीद श्री गुरु तेग बहादुर जी के अद्वितीय बलिदान को नमन करने का अवसर है। उनका त्याग मानवता, धार्मिक स्वतंत्रता और निडरता का प्रतीक है। यह आयोजन नई पीढ़ी को उस धरोहर से परिचित कराता है, जिसने सिख पंथ को विश्वभर में अद्वितीय पहचान दिलाई है।

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