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आसान नहीं दिल्ली के जिमखाना क्लब को खाली कराने की राह, मैदान में उतरे सिंघवी, हाईकोर्ट में होगी कानूनी जंग

राजधानी दिल्ली का प्रतिष्ठित जिमखाना क्लब(Gymkhana Club) इन दिनों बड़े विवाद के केंद्र में है। केंद्र सरकार द्वारा क्लब की जमीन खाली कराने के आदेश के बाद मामला अब कानूनी मोड़ ले चुका है। सरकार का दावा है कि सफदरजंग रोड स्थित यह क्षेत्र राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है इसलिए जमीन का उपयोग रक्षा ढांचे और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए किया जाना जरूरी है। दूसरी ओर, क्लब के सदस्य और कर्मचारी इस फैसले को जल्दबाजी में लिया गया कदम बता रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, क्लब की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी को कानूनी लड़ाई की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बताया जा रहा है कि दिल्ली हाईकोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की जाएंगी। पहली याचिका क्लब के स्थायी सदस्यों की तरफ से और दूसरी वहां कार्यरत कर्मचारियों की ओर से दायर होगी। कर्मचारियों का कहना है कि यह फैसला सीधे तौर पर उनकी रोजी-रोटी पर असर डाल सकता है।

कितना पुराना है ऐतिहासिक क्लब ?

करीब 113 साल पुराने इस ऐतिहासिक क्लब के सदस्यों ने रविवार को लंबी बैठक कर आगे की रणनीति तैयार की। यह बैठक उस सरकारी आदेश के बाद हुई जिसमें भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने क्लब से परिसर, लॉन और अन्य सुविधाएं खाली करने को कहा था। जानकारी के मुताबिक, सरकार द्वारा नियुक्त जनरल कमेटी ने भी फिलहाल स्थिति स्पष्ट होने तक यथास्थिति बनाए रखने की मांग की है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि लीज की शर्तों के तहत सरकार को सार्वजनिक हित में जमीन वापस लेने का पूरा अधिकार है। बताया जा रहा है कि यह उन चुनिंदा मामलों में से एक है।

जहां स्थायी लीज को समय से पहले समाप्त कर ‘री-एंट्री’ प्रक्रिया शुरू की गई है।हालांकि क्लब से जुड़े लोग सरकार के इस तर्क से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि क्लब दशकों से उसी स्थान पर संचालित हो रहा है और पहले कभी सुरक्षा को लेकर कोई गंभीर आपत्ति नहीं उठाई गई। कुछ सदस्यों ने सवाल किया कि यदि यह इलाका इतना संवेदनशील था तो इतने वर्षों तक क्लब के संचालन पर आपत्ति क्यों नहीं जताई गई।

600 कर्मचारियों पर पड़ सकता है असर

इस विवाद का सबसे बड़ा असर क्लब में काम करने वाले करीब 600 कर्मचारियों पर पड़ सकता है। कई कर्मचारियों ने चिंता जताई है कि अचानक लिए गए फैसले से उनका भविष्य अनिश्चित हो गया है। कुछ कर्मचारी पिछले 25 वर्षों से यहां सेवाएं दे रहे हैं और अब उन्हें नौकरी जाने का डर सता रहा है। कर्मचारियों के संगठन ने भी सरकार के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि इससे सैकड़ों परिवार आर्थिक संकट में आ सकते हैं।

हाईकोर्ट की सुनवाई का इंतजार

इस मामले पर कई पूर्व नौकरशाहों, सैन्य अधिकारियों और सामाजिक हस्तियों ने भी प्रतिक्रिया दी है। उनका मानना है कि दिल्ली जिमखाना क्लब सिर्फ एक इमारत नहीं बल्कि राजधानी की ऐतिहासिक और खेल विरासत का हिस्सा है। इतिहासकारों के अनुसार, यह क्लब ब्रिटिश दौर से जुड़ा रहा है और स्वतंत्रता के बाद भी इसकी सांस्कृतिक पहचान बनी रही। अब यह विवाद केवल जमीन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि विरासत, रोजगार और सरकारी अधिकारों के बीच टकराव का बड़ा मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में दिल्ली हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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