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विदेश भेजने के नाम पर 60 लाख की ठगी का भंडाफोड़, चंडीगढ़ में दो आरोपी गिरफ्तार

चंडीगढ़(Chandigarh) पुलिस ने अवैध इमिग्रेशन और विदेश भेजने के नाम पर होने वाली ठगी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई की है। सेक्टर-26 थाना पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो लोगों को न्यूजीलैंड में नौकरी और वर्क परमिट दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी कर रहा था। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

जांच में सामने आया है कि आरोपी सेक्टर-26 स्थित टिंबर मार्केट के माय सोहो वर्कस्पेस में “एम/एस ट्रूवे कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड” के नाम से एक फर्म चला रहे थे। इस कंपनी के जरिए वे लोगों को विदेश में रोजगार, वीजा प्रोसेसिंग और वर्क परमिट दिलाने का झूठा भरोसा देते थे। आरोपियों की पहचान युवराज सोबती और हरनीत वालिया के रूप में हुई है। दोनों पर आरोप है कि वे कई लोगों से संपर्क कर उन्हें न्यूजीलैंड भेजने का लालच देकर मोटी रकम वसूलते थे।

शिकायत के बाद दर्ज हुआ मामला

इस पूरे मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई, जो बाबिता ने अपने भाई विवेक कुमार की ओर से पुलिस को दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि आरोपियों ने वीजा और विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर भारी रकम ली और बाद में कोई प्रक्रिया पूरी नहीं की। शिकायत के आधार पर सेक्टर-26 थाना पुलिस ने 23 मई 2026 को एफआईआर दर्ज की। मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और इमिग्रेशन एक्ट की धारा 24 के तहत दर्ज किया गया।

करीब 60 लाख रुपये की ठगी का आरोप

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने शिकायतकर्ता समेत अन्य लोगों से लगभग 59 लाख 92 हजार रुपये की ठगी की है। पैसे लेने के बाद आरोपियों ने न तो वीजा प्रक्रिया पूरी की और न ही किसी तरह की सेवा प्रदान की। जैसे ही पीड़ितों ने पैसे वापस मांगने शुरू किए आरोपियों ने अपना ऑफिस बंद कर दिया और वहां से फरार हो गए। इसके बाद पीड़ितों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

गुप्त सूचना से मिली सफलता

FIR दर्ज होने के बाद पुलिस लगातार आरोपियों की तलाश में जुटी थी। इसी दौरान मिली एक गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद उनसे पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि दोनों आरोपियों के खिलाफ पहले भी इमिग्रेशन फ्रॉड और धोखाधड़ी के कई मामले दर्ज हैं। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं और कितने लोगों को अब तक ठगा गया है।

फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों के बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड और ग्राहकों की सूची की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में आगे और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या यह किसी संगठित इमिग्रेशन फ्रॉड नेटवर्क का हिस्सा है।

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