महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों के चुनाव के लिए शुक्रवार सुबह 10 बजे से मतगणना शुरू हो चुकी है। इन चुनावों के लिए 15 जनवरी को मतदान कराया गया था। राज्यभर में कुल 893 वार्डों में मुकाबला हुआ, जिसमें 15,931 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई है।
वहीं, मतगणना के साथ-साथ राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और रुझानों पर सभी दलों की नजर बनी हुई है। अंतिम नतीजों से यह तय होगा कि शहरी स्थानीय निकायों में किस पार्टी का दबदबा कायम रहेगा।
कैसा है कांग्रेस का दाव ?
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनावों में इस बार सियासी समीकरण बदले हुए नजर आ रहे हैं। कुल 227 सीटों पर हो रहे चुनाव में भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) ने मिलकर मैदान संभाला है। गठबंधन के तहत भाजपा ने 137 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि शिंदे गुट की शिवसेना 90 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। दूसरी ओर, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के साथ गठबंधन किया है।
इस समझौते के तहत यूबीटी ने 163 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए हैं, जबकि मनसे को 52 सीटें दी गई हैं। कांग्रेस ने वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) के साथ हाथ मिलाया है। कांग्रेस 143 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और वीबीए को 46 सीटों पर मौका दिया गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) इस चुनाव में बिना किसी गठबंधन के मैदान में उतरी है। अजित पवार गुट की एनसीपी ने 94 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जिससे मुकाबला और ज्यादा दिलचस्प हो गया है।
झटका दे रहे रुझान
अलग-अलग एग्जिट पोल के आँकड़े लगभग एक जैसी तस्वीर पेश कर रहे हैं। इन अनुमानों के मुताबिक, मुंबई में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को स्पष्ट बहुमत मिलने की संभावना जताई जा रही है। अगर ये अनुमान सही साबित होते हैं, तो यह महायुति के लिए बड़ी राजनीतिक बढ़त मानी जाएगी। वहीं दूसरी ओर, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे के लिए एग्जिट पोल के नतीजे बड़ा झटका साबित हो सकते हैं। मुंबई जैसे अहम राजनीतिक गढ़ में अपेक्षित समर्थन न मिलना ठाकरे परिवार की राजनीति के लिए गंभीर चुनौती के संकेत दे रहा है।
पुणे में भी भाजपा का दबदबा साफ नजर आ रहा है। एग्जिट पोल संकेत देते हैं कि भाजपा यहाँ अकेले दम पर अपने प्रतिद्वंद्वियों पर भारी पड़ती दिख रही है। खास बात यह है कि भाजपा ने पुणे में बिना किसी बड़े सहयोगी के चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया था। पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुट-शरद पवार और अजित पवार-के एकजुट होने से राजनीतिक हलचल जरूर तेज हुई। चाचा-भतीजे के इस गठबंधन ने चुनावी समीकरणों को दिलचस्प बना दिया, लेकिन इसके बावजूद एकजुट एनसीपी भाजपा को निर्णायक चुनौती देने में सफल होती नहीं दिख रही है। कुल मिलाकर, एग्जिट पोल महाराष्ट्र के प्रमुख शहरी इलाकों में भाजपा और उसके सहयोगियों के पक्ष में माहौल बनने की ओर इशारा कर रहे हैं, जबकि विपक्षी दलों के लिए नतीजे उम्मीदों से कम रहने की संभावना जताई जा रही है।
चार साल की देरी से हुए BMC चुनाव
बीएमसी चुनाव सामान्य तौर पर हर पांच साल में कराए जाते हैं। पिछला चुनाव वर्ष 2017 में हुआ था, जिसके बाद अगला चुनाव 2022 में प्रस्तावित था। हालांकि, उस समय निर्वाचन प्रक्रिया और वार्ड सीमाओं के पुनर्गठन को लेकर काम चल रहा था, जिसके कारण चुनाव टाल दिए गए।
बीएमसी में वार्डों की संख्या 227 से बढ़ाकर 236 करने का प्रस्ताव रखा गया था और नए वार्ड नक्शे तैयार किए जा रहे थे। इस प्रक्रिया के चलते पुरानी वार्ड संरचना पर चुनाव कराना संभव नहीं हो पाया। बाद में यह प्रस्ताव मंजूर नहीं हुआ, लेकिन तब तक चुनाव में काफी देरी हो चुकी थी।
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