Bhgwan Shri Krishna Son Pradyumna Story: भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़ी अनेक लीलाएं और कहानियां आज भी लोगों को हैरानी में डाल देती हैं। इन्हीं में से एक कथा उनके बड़े बेटे प्रद्युम्न की है, जिनका जन्म होते ही उनके जीवन में एक ऐसी घटना हुई जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। श्रीमद्भागवत महापुराण और अन्य दूसरे धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, द्वारका में भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के घर जन्मे प्रद्युम्न का जन्म पहले से ही एक भविष्यवाणी से जुड़ा था। इसी भविष्यवाणी के कारण एक शक्तिशाली दानव ने उनके जीवन को खत्म करने की साजिश रची, लेकिन किस्मत ने ऐसा मोड़ लिया कि वही बालक आगे चलकर भविष्यवाणी को सच साबित कर गया।
भविष्यवाणी से भयभीत हो गया था शंबरासुर
श्रीमद्भागवत महापुराण और अन्य पुराणों के अनुसार, प्रद्युम्न के जन्म से पहले यह भविष्यवाणी हुई थी कि भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के पुत्र के हाथों ही शंबरासुर नाम के बेहद शक्तिशाली दानव का अंत होगा। इस भविष्यवाणी की जानकारी मिलते ही शंबरासुर भयभीत हो गया थ, उसे लगा कि यदि बालक को जन्म लेते ही खत्म कर दिया जाए, तो यह भविष्यवाणी कभी पूरी नहीं होगी।
जन्म के छह दिन बाद कर लिया अपहरण
इसी डर के कारण प्रद्युम्न के जन्म के छठे दिन शंबरासुर मायावी रूप धारण कर द्वारका पहुंचा। उसने नवजात शिशु का अपहरण किया और बिना देर किए उसे समुद्र में फेंक दिया। जब राजमहल में बालक नहीं मिला तो भगवान श्रीकृष्ण, माता रुक्मिणी और पूरे राजपरिवार ने उसकी खोज करवाई, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। अंत में सभी ने यही मान लिया कि बालक समुद्र में डूब गया होगा।
विशाल मछली ने कैसे बचाई जान?
समुद्र में गिरते ही एक विशाल मछली ने प्रद्युम्न को निगल लिया। हैरानी की बात ये रही की मछली के निगल जाने के बाद भी बालक पूरी तरह सुरक्षित रहा। कुछ समय बाद मछुआरों ने उसी मछली को पकड़ लिया और संयोगवश वह शंबरासुर के महल की रसोई में पहुंच गई। जब रसोइयों ने मछली का पेट काटा तो उसके भीतर से जीवित शिशु मिला। महल में मौजूद मायावती ने उस बालक को अपने संरक्षण में ले लिया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मायावती वास्तव में रति देवी थीं, जो अपने पति कामदेव के पुनर्जन्म की प्रतीक्षा कर रही थीं। प्रद्युम्न को कामदेव का ही पुनर्जन्म माना जाता है, क्योंकि भगवान शिव के क्रोध से भस्म होने के बाद उन्होंने श्रीकृष्ण के पुत्र के रूप में जन्म लिया था।
शत्रु के महल में ही हुआ पालन-पोषण
शंबरासुर इस बात से पूरी तरह अनजान रहा कि जिस बालक को वह मारना चाहता था, वही उसके महल में पल-बढ़ रहा है। समय बीतने के साथ प्रद्युम्न तेजस्वी, पराक्रमी और दिव्य शक्तियों से संपन्न बालक बने। बाद में देवर्षि नारद ने उन्हें उनके वास्तविक जन्म और माता-पिता की जानकारी दी। इसके बाद मायावती ने उन्हें महामाया विद्या का ज्ञान दिया, जिससे वे शंबरासुर की मायावी शक्तियों का सामना करने में सक्षम हो सकें।
फिर पूरी हुई भविष्यवाणी
अपनी वास्तविक पहचान जानने के बाद प्रद्युम्न ने शंबरासुर को युद्ध की चुनौती दी। भीषण युद्ध में उन्होंने अपनी दिव्य शक्ति और मायावती द्वारा सिखाई गई विद्या के बल पर शंबरासुर का वध कर दिया। इस तरह वह भविष्यवाणी सच साबित हुई, जिससे बचने के लिए दानव ने जन्म के समय ही षड्यंत्र रचा था। इसके बाद प्रद्युम्न मायावती के साथ द्वारका लौटे। शुरुआत में उन्हें कोई पहचान नहीं सका, लेकिन जब देवर्षि नारद ने पूरा रहस्य बताया तो माता रुक्मिणी और भगवान श्रीकृष्ण अपने खोए हुए पुत्र को पाकर भावविभोर हो उठे। इसके बाद पूरे द्वारका में उत्सव मनाया गया।
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