उत्तराखंड के चर्चित बदरीनाथ मंदिर(Badrinath Temple) दान चोरी मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने पूर्व मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान को गिरफ्तार कर लिया है। उनसे करीब चार घंटे तक पूछताछ की गई, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। जानकारी के मुताबिक, उन्हें 18 जुलाई को अदालत में पेश किया जाएगा। राजेंद्र चौहान 30 जून को ही अपने पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोप है कि राजेंद्र चौहान ने अपने कार्यकाल के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं कीं। उन पर नियमों की अनदेखी करते हुए दान पेटियों से मिलने वाली नकदी में गड़बड़ी करने का आरोप है। मंदिर के ऑडिट के दौरान जब वित्तीय गड़बड़ियों के संकेत मिले तब इस पूरे मामले की जांच शुरू की गई और बाद में इसकी जिम्मेदारी SIT को सौंपी गई।
ऐसे सामने आया पूरा मामला
मामले की शुरुआत 2 जुलाई को हुई, जब भैरव सेना की शिकायत के बाद बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) ने मंदिर के सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई। जांच में कर्मचारी प्रमोद नौटियाल गिनती के दौरान नकदी और सोने-चांदी के सिक्के ले जाते हुए दिखाई दिए।
इसके बाद 4 जुलाई को जांच समिति बनाई गई प्रमोद नौटियाल को निलंबित किया गया और 8 जुलाई को बदरीनाथ थाने में मामला दर्ज कराया गया। साथ ही तीन सदस्यीय SIT का गठन कर 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए। जांच के दौरान लैपटॉप समेत अन्य जरूरी सामान और सीसीटीवी रिकॉर्डिंग भी जब्त की गई।
मामले में हुई दूसरी गिरफ्तारी
SIT ने 12 जुलाई को देहरादून से प्रमोद नौटियाल को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान उन्होंने खुद को निर्दोष बताया। अब राजेंद्र चौहान की गिरफ्तारी इस मामले में दूसरी बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। इस घटना ने मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। साथ ही, श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी लगातार उठ रही है।