उत्तराखंड के पवित्र तीर्थ स्थल बदरीनाथ धाम(Badrinath Dham) में व्यवस्था, स्वच्छता और धार्मिक गरिमा बनाए रखने के लिए नगर पंचायत ने नए नियम लागू करने की तैयारी पूरी कर ली है। इन प्रस्तावित उपविधियों के लागू होने के बाद किसी भी तरह के धार्मिक या सामाजिक आयोजन जैसे भागवत कथा, भंडारा या अन्य विशेष कार्यक्रम के लिए पहले से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति आयोजन करने पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
नगर पंचायत की ओर से तैयार किए गए इन नए बायलॉज का उद्देश्य तीर्थ क्षेत्र में लगातार बढ़ रही भीड़ और अव्यवस्थित गतिविधियों पर नियंत्रण करना है, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर और सुव्यवस्थित सुविधाएं मिल सकें। हर साल यहां बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं और कई लोग अपने स्तर पर आयोजन भी करते हैं, लेकिन कई बार बिना अनुमति होने वाले कार्यक्रम प्रशासन के लिए चुनौती बन जाते हैं।
क्या कहते हैं नए नियम ?
नए नियमों के मुताबिक, अब सभी आयोजकों को ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से पहले नगर पंचायत से अनुमति लेनी होगी। इसके साथ ही आयोजन के लिए निर्धारित यूजर चार्ज भी जमा करना होगा, ताकि क्षेत्र में साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं को बेहतर तरीके से संभाला जा सके। इसके अलावा, सबसे सख्त प्रावधानों में से एक मांसाहार पर पूर्ण प्रतिबंध है।
नए नियम लागू होने के बाद बदरीनाथ धाम क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति मांस या उससे संबंधित सामग्री लेकर प्रवेश नहीं कर सकेगा। यदि कोई इसका उल्लंघन करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ जुर्माने और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान होगा। प्रशासन के मुताबिक, पहले भी कुछ मामलों में नियमों का उल्लंघन सामने आया था, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया है।
बिना अनुमति के निर्माण माना जाएगा अवैध
इसके साथ ही अस्थायी झुग्गी-झोपड़ी या आवास बनाने के लिए भी अब पूर्व अनुमति लेना जरूरी होगा। बिना अनुमति किसी भी तरह का निर्माण अवैध माना जाएगा और ऐसे अस्थायी ढांचों में शौचालय जैसी बुनियादी स्वच्छता व्यवस्था रखना भी अनिवार्य होगा। नगर पंचायत ने इन नियमों के लिए तीन अलग-अलग उपविधियां तैयार की हैं – मांसाहार परिवहन एवं उपयोग प्रतिबंध, अस्थायी आवास एवं स्वच्छता नियंत्रण, और धार्मिक आयोजनों के संचालन से जुड़ी नियमावली।
सभी प्रस्तावों को सुझाव और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी करने के बाद गजट नोटिफिकेशन के लिए भेज दिया गया है। जैसे ही गजट नोटिफिकेशन जारी होगा, ये नियम तुरंत प्रभावी हो जाएंगे। प्रशासन का कहना है कि इनका मकसद धार्मिक स्थल की पवित्रता बनाए रखना, भीड़ प्रबंधन को सुधारना और आने वाले श्रद्धालुओं को अधिक व्यवस्थित व सुविधाजनक अनुभव देना है।