Punjab: सस्पेंड DIG भुल्लर को जमानत, आय से अधिक संपत्ति केस में चालान पेश नहीं कर पाई CBI
अदालत ने यह फैसला इसलिए सुनाया क्योंकि CBI तय कानूनी समय-सीमा के भीतर चार्जशीट (चालान) दाखिल करने में विफल रही। हालांकि इस राहत के बावजूद भुल्लर फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे, क्योंकि वे जबरन वसूली से जुड़े एक अन्य मामले में अब भी न्यायिक हिरासत में हैं।
चंडीगढ़ स्थित CBI की विशेष अदालत ने सोमवार को सस्पेंड DIG हरचरण सिंह भुल्लर को आय से अधिक संपत्ति के मामले में बड़ी राहत देते हुए डिफॉल्ट जमानत दे दी। अदालत ने यह फैसला इसलिए सुनाया क्योंकि CBI तय कानूनी समय-सीमा के भीतर चार्जशीट (चालान) दाखिल करने में विफल रही। हालांकि इस राहत के बावजूद भुल्लर फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे, क्योंकि वे जबरन वसूली से जुड़े एक अन्य मामले में अब भी न्यायिक हिरासत में हैं।
60 दिनों में चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई CBI
सुनवाई के दौरान CBI की ओर से पेश वकील नरिंदर सिंह ने अदालत में दलील दी कि आय से अधिक संपत्ति जैसे गंभीर मामलों में 90 दिनों की वैधानिक समय-सीमा लागू होती है। लेकिन अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि इस मामले में 60 दिनों की अवधि ही मान्य होगी। वहीं, बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एसपीएस भुल्लर, युवराज धालीवाल और समरिता ने अदालत को बताया कि CBI निर्धारित 60 दिनों के भीतर चालान पेश करने में पूरी तरह नाकाम रही है। ऐसे में आरोपी को कानून के तहत डिफॉल्ट बेल का लाभ दिया जाना चाहिए।
अदालत ने बचाव पक्ष की दलील मानी
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पहले आदेश सुरक्षित रखा और बाद में भुल्लर की जमानत अर्जी मंजूर कर ली। जमानत की प्रक्रिया पूरी करते हुए बचाव पक्ष ने अदालत में जमानती भी पेश किए।
जमानत के बावजूद जेल में रहेंगे भुल्लर
हालांकि आय से अधिक संपत्ति के मामले में जमानत मिलने के बावजूद हरचरण सिंह भुल्लर की तत्काल रिहाई संभव नहीं है। जबरन वसूली से जुड़े एक अन्य मामले में उनकी जमानत याचिका पहले ही CBI कोर्ट खारिज कर चुकी है। इस मामले में भुल्लर ने अब तक हाईकोर्ट में कोई याचिका दाखिल नहीं की है, जिसके चलते उन्हें जेल में ही रहना होगा।
29 अक्टूबर को दर्ज हुआ था मामला
CBI ने 29 अक्टूबर को रिश्वतखोरी से जुड़े एक मामले की जांच के दौरान हरचरण सिंह भुल्लर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज किया था। उस समय भुल्लर पहले से ही रिश्वत मामले में न्यायिक हिरासत में थे। इस केस में उनकी औपचारिक गिरफ्तारी 5 नवंबर को दिखाई गई थी।
2 जनवरी को खारिज हुई थी जमानत अर्जी
इससे पहले 2 जनवरी को अदालत ने भुल्लर की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। उस समय अदालत को बताया गया था कि कथित बिचौलिए ने शिकायतकर्ता आकाश बट्टा से 5 अगस्त 2025 को एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी, जबकि इस संबंध में सीबीआई में शिकायत 11 अक्टूबर 2025 को दर्ज कराई गई थी।
आगे क्या?
अब आय से अधिक संपत्ति मामले में भुल्लर को भले ही कानूनी राहत मिल गई हो, लेकिन जबरन वसूली मामले में अगली कानूनी रणनीति और संभावित हाईकोर्ट याचिका पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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