ईरान फिर हिंसा की आग में, फोन-इंटरनेट ठप, ट्रंप की वार्निंग...

ईरान में, बिगड़ती आर्थिक स्थिति और बढ़ती महंगाई के कारण बाजारों में उथल-पुथल मची हुई है। व्यापारियों का एक बड़ा वर्ग सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करता देखा गया है, और इन विरोध प्रदर्शनों को अब जेनरेशन Z का भी समर्थन मिल गया है।

Jan 9, 2026 - 17:45
Jan 9, 2026 - 17:42
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ईरान फिर हिंसा की आग में, फोन-इंटरनेट ठप, ट्रंप की वार्निंग...

ईरान एक बार फिर सुलग उठा है। महंगाई और गहराते आर्थिक संकट के खिलाफ भड़का जनआक्रोश अब देशव्यापी आंदोलन में बदल चुका है। बीते 12 दिनों से जारी प्रदर्शनों ने राजधानी तेहरान से लेकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों तक सरकार की नींद उड़ा दी है। हालात इतने बिगड़ गए कि गुरुवार देर रात ईरान की खामेनेई सरकार ने इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दीं, जिससे देश का दुनिया से संपर्क लगभग कट गया।

प्रदर्शनों के दौरान अब तक भारी हिंसा की खबरें सामने आई हैं। ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट एजेंसी के अनुसार, 12 दिनों में कम से कम 45 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 8 नाबालिग भी शामिल हैं। वहीं ईरानी सरकार आधिकारिक तौर पर 21 मौतों की पुष्टि कर रही है। सड़कों पर उतरे लोग महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और सरकारी दमन के खिलाफ खुलकर नारेबाजी कर रहे हैं।

क्यों एक बार फिर उबल रहा ईरान?

ईरान में 28 दिसंबर से लगातार जनआंदोलन देखने को मिल रहा है। बीते कुछ हफ्तों में देश के कई हिस्सों से असंतोष की तस्वीरें सामने आई हैं-कहीं शिक्षक और सरकारी कर्मचारी काम छोड़कर सड़कों पर हैं, तो कहीं युवाओं के नेतृत्व में विरोध मार्च निकाले जा रहे हैं। महिलाओं द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर खुला विरोध और Gen-Z की सक्रिय भागीदारी ने इन आंदोलनों को और मुखर बना दिया है।

हालांकि हर जगह विरोध की वजह अलग-अलग दिखती है-कहीं बकाया वेतन, कहीं आसमान छूती महंगाई, तो कहीं नैतिक पुलिस की सख्ती-लेकिन इन सबके पीछे जो गुस्सा है, उसकी जड़ें कहीं ज्यादा गहरी और पुरानी हैं।

महंगाई और बेरोज़गारी का दबाव

ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से संकट में है। रियाल मुद्रा रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच चुकी है, महंगाई चरम पर है और बेरोजगारी ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। 28 दिसंबर 2025 को तेहरान के बाजारों में हड़ताल से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन कुछ ही दिनों में पूरे देश में फैल गया। इसके साथ ही अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों ने तेल निर्यात को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे सरकारी राजस्व घटा है।

नतीजा यह है कि, महंगाई लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई है और रोज़मर्रा की ज़िंदगी आम लोगों के लिए मुश्किल होती जा रही है। सबसे ज्यादा असर युवाओं पर पड़ा है। पढ़ा-लिखा युवा वर्ग बेरोज़गारी से जूझ रहा है। डिग्री लेने के बाद भी न नौकरी मिल रही है और न ही जो काम उपलब्ध है, उसमें सम्मानजनक वेतन। यह आर्थिक हताशा धीरे-धीरे सड़कों पर गुस्से और विरोध के रूप में फूट रही है।

सिर्फ हिजाब नहीं, अधिकार और पहचान की लड़ाई

अक्सर ईरान में होने वाले विरोध प्रदर्शनों को केवल ‘हिजाब विरोध’ के चश्मे से देखा जाता है, लेकिन हकीकत इससे कहीं आगे की है। महिलाओं का गुस्सा कई स्तरों पर है जिनमें जीवनशैली पर सरकारी नियंत्रण, शिक्षा और रोज़गार में छिपा हुआ भेदभाव और लगातार निगरानी और भय का माहौल भी शामिल है। 

महिलाओं के लिए यह आंदोलन अब सिर्फ कपड़ों तक सीमित नहीं रहा। यह अपने फैसले खुद लेने, सम्मान के साथ जीने और पहचान स्थापित करने की लड़ाई बन चुका है। यही वजह है कि आज ईरान की सड़कों पर महिलाओं की आवाज़ पहले से कहीं ज्यादा बुलंद सुनाई दे रही है।

रेजा पहलवी की अपील से बढ़ी उग्रता

ईरान से निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी की हालिया अपील ने आग में घी डालने का काम किया है। उनकी अपील के बाद गुरुवार को प्रदर्शन और उग्र हो गए। बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे, जिससे हालात काबू से बाहर होते नजर आए। इसके बाद सरकार ने भारी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात कर दिया और इंटरनेट-फोन सेवाएं बंद करने का फैसला लिया।

इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था नेटब्लॉक्स के मुताबिक, ईरान में इस समय लगभग पूरे देश में इंटरनेट ब्लैकआउट की स्थिति है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम विरोध प्रदर्शनों की तस्वीरें और सूचनाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलने से रोकने के लिए उठाया गया है।

ट्रंप की ‘फाइनल वॉर्निंग’ से बढ़ा तनाव

इस बीच अमेरिका ने भी ईरान को सख्त चेतावनी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसा की, तो अमेरिका कड़ा जवाब देगा। ट्रंप ने इसे “लॉक एंड लोडेड” करार देते हुए संकेत दिया कि अमेरिका किसी भी कार्रवाई के लिए तैयार है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका-ईरान संबंध पहले से ही मिसाइल और न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर तनावपूर्ण हैं। ट्रंप की चेतावनी से ईरान में हालात और संवेदनशील हो गए हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब तेहरान पर टिकी हैं।

जारी रहेगा सरकार का दमन ? 

फिलहाल ईरान में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। सड़कों पर गुस्सा है, सरकार सख्ती के मूड में है और अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ रहा है। सवाल यह है कि क्या खामेनेई सरकार जनता की मांगों पर ध्यान देगी या फिर दमन का रास्ता चुनकर हालात को और विस्फोटक बना देगी। आने वाले दिन ईरान के भविष्य के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।

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