Haryana : फरीदाबाद में एक शख्स के साथ Scam, ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर ठगे लाखों रुपये
हरियाणा के फरीदाबाद जिले में एक चौंकाने वाली साइबर ठगी का मामला सामने आया है, जहां ठगों ने खुद को CBI मुंबई, DCP बैंगलोर और टेलीकम्युनिकेशन विभाग के अधिकारी बताकर एक व्यक्ति को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया।
हरियाणा के फरीदाबाद जिले में एक चौंकाने वाली साइबर ठगी का मामला सामने आया है, जहां ठगों ने खुद को CBI मुंबई, DCP बैंगलोर और टेलीकम्युनिकेशन विभाग के अधिकारी बताकर एक व्यक्ति को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया। साथ ही, ठगों ने पीड़ित के बैंक खातों से ₹81 लाख अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए।
सरकारी अधिकारी बनकर किया ठगी
सेक्टर 7-डी निवासी सुबोध ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 14 अक्टूबर को उन्हें एक वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को CBI मुंबई का अधिकारी बताया और कहा कि उनके बैंक खाते का नाम मनी लॉन्ड्रिंग केस में सामने आया है। उसने दावा किया कि उनके खाते से गैर-कानूनी लेन-देन किए गए हैं और जांच के लिए उनके सहयोग की जरूरत है। अगले दिन एक अन्य शख्स ने संपर्क किया, जिसने खुद को DCP बैंगलोर बताया। उसने कहा कि पीड़ित का नाम ह्यूमन ट्रैफिकिंग जैसे गंभीर अपराधों में भी आ रहा है। बाद में एक तीसरे व्यक्ति ने डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन का अधिकारी बनकर कहा कि उनकी कॉल रिकॉर्डिंग में गैर-कानूनी गतिविधियों के सबूत मिले हैं।
5 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा
पीड़ित को लगातार पांच दिनों तक वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा गया। ठगों ने उसे परिवार या दोस्तों से संपर्क करने से रोका और कहा कि मामले से बचने के लिए उसे ‘जांच खातों’ में रकम ट्रांसफर करनी होगी। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग खातों में कुल ₹81 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। जब ठगों ने कॉल बंद की और कोई संपर्क नहीं रहा, तब जाकर सुबोध को समझ आया कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुका है। इसके बाद उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने किया आरोपी को गिरफ्तार
पुलिस प्रवक्ता यशपाल ने बताया कि जांच के दौरान पुलिस ने राजस्थान के जोधपुर से धर्मेंद्र सोनी नाम के एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी 12वीं पास और बेरोजगार है। उसने स्वीकार किया कि उसने गोकुल नाम के व्यक्ति को बैंक खाता दिया था, जिसके माध्यम से ठगी का पैसा ट्रांसफर हुआ। गोकुल के खाते में ₹30 लाख रुपये आए थे। पुलिस अब गोकुल और अन्य साथियों की तलाश कर रही है।
क्या है ‘डिजिटल अरेस्ट’ ?
‘डिजिटल अरेस्ट’ असल में कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि साइबर अपराधियों का नया घोटाला है। इसमें ठग खुद को सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं कि वे मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी या ह्यूमन ट्रैफिकिंग जैसे मामलों में फंसे हैं। फिर उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी में रखते हैं, गिरफ्तारी की धमकी देते हैं, और कहते हैं कि जांच के लिए पैसा “सुरक्षित खाते” में ट्रांसफर करें, जो दरअसल ठगों के ही खाते होते हैं।
‘डिजिटल अरेस्ट’ से कैसे बचें ?
- ‘डिजिटल अरेस्ट’ से बचने के लिए शांत रहें, घबराएं नहीं। असली सरकारी एजेंसियां कभी फोन या वीडियो कॉल पर पैसा नहीं मांगतीं।
- कॉल तुरंत काट दें और किसी भी अजनबी से धन संबंदी जानकारी साझा न करें।
- पुष्टी करें संबंधित एजेंसी की आधिकारिक वेबसाइट से नंबर लेकर खुद संपर्क करें।
- ओटीपी, बैंक डिटेल या आधार नंबर साझा न करें।
- किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश की जानकारी तुरंत cybercrime.gov.in या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें।
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