Delhi में साइबर ठगी का भंडाफोड़, करीब 180 करोड़ के लेन-देन का खुलासा…

इस मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ जब यह बात सामने आई कि राजेश खन्ना, जिनके नाम पर कंपनियाँ रजिस्टर्ड थीं, FIR दर्ज होने के बाद नोएडा के एक होटल में मर गए थे।

Jan 3, 2026 - 13:14
Jan 3, 2026 - 13:14
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Delhi में साइबर ठगी का भंडाफोड़, करीब 180 करोड़ के लेन-देन का खुलासा…
Delhi crime

नई दिल्ली ज़िले की साइबर पुलिस ने ऑपरेशन साइ-हॉक के तहत एक बड़े और संगठित साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। जांच में सामने आया कि यह गिरोह शेल कंपनियों और म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल कर देशभर में ठगी से जुटाई गई रकम को इधर-उधर घुमा रहा था। हैरानी की बात यह है कि पैसों की लेयरिंग के लिए एक-दो नहीं, बल्कि 20 फर्जी कंपनियां बनाई गई थीं।

एक संदिग्ध बैंक खाते से खुली परतें

NCRP पोर्टल पर दर्ज शिकायतों की पड़ताल के दौरान पुलिस की नजर IDFC बैंक के एक खाते पर गई, जिसमें लगातार साइबर ठगी से जुड़ा पैसा जमा हो रहा था। यह खाता कुड्रेमुख ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर खोला गया था। शुरुआती जांच में ही यह स्पष्ट हो गया कि यह एक म्यूल अकाउंट है। इसके बाद साइबर पुलिस स्टेशन, नई दिल्ली ज़िले में FIR दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की गई।

कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी बना ‘डायरेक्टर’

जांच में पता चला कि कंपनी का डायरेक्टर राजेश खन्ना था, जो एक कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर काम करने वाला कर्मचारी था। पूछताछ में उसने बताया कि सुशील चावला और राजेश कुमार के कहने पर उसके नाम पर कंपनी और बैंक खाते खोले गए थे। असल में खातों और पैसों पर पूरा नियंत्रण इन्हीं दोनों का था। इसी पैटर्न पर अलग-अलग नामों से कुल 20 शेल कंपनियां बनाकर ठगी की रकम को घुमाया जा रहा था।

176 शिकायतें, करीब 180 करोड़ का ट्रांजैक्शन

इन सभी कंपनियों के बैंक खातों की जांच करने पर देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़ी 176 साइबर फ्रॉड शिकायतें सामने आईं। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, इन खातों के ज़रिए लगभग 180 करोड़ रुपये का लेन-देन किया गया। रकम को कई लेयर में ट्रांसफर कर असली स्रोत को छिपाने की कोशिश की गई थी।

FIR के बाद संदिग्ध मौत

मामले ने तब और गंभीर मोड़ ले लिया, जब यह सामने आया कि जिन राजेश खन्ना के नाम पर कंपनियां खोली गई थीं, उनकी FIR दर्ज होने के बाद नोएडा के एक होटल में मौत हो गई। जांच में संकेत मिले हैं कि उसे केवल एक मोहरे की तरह इस्तेमाल किया गया, जबकि पूरे नेटवर्क की कमान सुशील चावला और राजेश कुमार के हाथ में थी।

बचते रहे आरोपी, आखिरकार गिरफ्त में आए 

शुरुआत में दोनों मुख्य आरोपी जांच में सहयोग करते दिखाई दिए, लेकिन बाद में सवालों से बचने लगे और नोटिस का जवाब देना बंद कर दिया। मोबाइल चैट्स और अन्य डिजिटल सबूतों से पूरे नेटवर्क की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने सुशील चावला और राजेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि इनके तार पश्चिम बंगाल में सक्रिय एक अन्य साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं।

पुलिस ने आरोपियों के पास से दो मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद किए हैं। सभी डिजिटल डिवाइस और बैंक खातों से जुड़ी जानकारी I4C को भेजी जा रही है, ताकि देशभर में दर्ज अन्य साइबर मामलों से इनके संभावित लिंक जोड़े जा सकें। फिलहाल पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े बाकी लोगों की तलाश में जुटी हुई है।

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