Wednesday, March 4, 2026
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आखिर आज के दिन क्यों लगता है भगवान कृष्ण को अन्नकूट का भोग, जानें इसके पीछे की वजह !

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गोवर्धन पूजा को अन्नकूट के उत्सव के साथ मनाया जाता है, बता दें कि दीपावली के बाद के दिन यानी कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन मनाया जाता है। इस दिन विशेष रूप से शाम को पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने इस दिन इंद्र देवता का मानमर्दन करके गिरिराज गोवर्धन की पूजा की थी। मथुरा और वृंदावन में इस पर्व को बड़ी धूमधाम से मनाने की परंपरा है, जहां भक्तजन अपने-अपने तरीकों से भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन महाराज की आराधना करते हैं।

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क्यों की जाती है गोवर्धन पर्वत की पूजा ?

कथानुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने द्वापर युग में ब्रजवासियों और उनके पशुओं को इंद्र देव के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाया था। यह घटना उन सभी के लिए सुरक्षा का प्रतीक बन गई, जिसके कारण गोवर्धन पर्वत को विशेष पूजनीय माना जाता है। इस दिन, भक्तगण अपने घरों के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर उसकी पूजा करते हैं और साथ ही अन्नकूट का प्रसाद तैयार करते हैं।

अन्नकूट प्रसाद का महत्व

अन्नकूट का अर्थ है अन्न का मिश्रण, जिसमें विभिन्न प्रकार की सब्जियाँ और अनाज होते हैं। यह भोग विशेष रूप से इस दिन का मुख्य आकर्षण होता है। अन्नकूट का प्रसाद तब बनाया जाता है जब भक्तगण अपने-अपने घरों में उपलब्ध सामग्री को इकट्ठा करके इसे एक साथ पकाते हैं। यह विशेष प्रसाद भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किया जाता है, जो प्राकृतिक संसाधनों के प्रति हमारी कृतज्ञता का प्रतीक है।इस दिन मंदिरों में अन्नकूट उत्सव का आयोजन भी होता है, जहां भक्तजन भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करते हैं। कई स्थानों पर इस दिन बाजरे की खिचड़ी या तेल की पूरी बनाई जाती है, जिसे पूजा के बाद प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। साथ ही, जगराता करने की भी परंपरा है, जिससे भक्तजन अपनी भक्ति और समर्पण को प्रकट करते हैं।

अन्नकूट का भोग चढ़ाने के लाभ

गोवर्धन पूजा का यह उत्सव न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करता है, बल्कि यह हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाए रखने की प्रेरणा भी देता है। इस दिन अन्नकूट का भोग चढ़ाना हमें यह याद दिलाता है कि हमें हमेशा प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान करना चाहिए और उनके प्रति आभार व्यक्त करना चाहिए। इस प्रकार, गोवर्धन पूजा एक महत्वपूर्ण पर्व है जो भक्ति, समर्पण और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है।