दुनिया भर में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल, पश्चिम एशिया के संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के भारी दबाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी मजबूती का लोहा मनवाया है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई है।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, यह वृद्धि दर पिछली तिमाही के 8.6 प्रतिशत के मुकाबले थोड़ी धीमी रही है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए यह उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन को दर्शाती है। वहीं, अर्थव्यवस्था के असली उत्पादन और कमाई को दर्शाने वाला ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) भी 8.2 प्रतिशत की मजबूत दर से आगे बढ़ा है।
सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग बने विकास के मुख्य आधार
इस तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की इस तेज रफ्तार का मुख्य श्रेय सर्विस और निर्माण क्षेत्र को जाता है। कुल सर्विस सेक्टर ने 10 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 8 प्रतिशत थी। सर्विस सेक्टर के भीतर बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, रियल एस्टेट और व्यावसायिक सेवाओं ने सबसे अधिक 12.1 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़त दर्ज की।
इसके साथ ही कारखानों में उत्पादन और निर्माण गतिविधियां भी काफी मजबूत रहीं, जिसमें 9.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। निर्माण क्षेत्र 7.7 प्रतिशत, व्यापार, होटल व परिवहन सेवाएँ 8.5 प्रतिशत और लोक प्रशासन व रक्षा सेवाएँ 7.5 प्रतिशत की दर से बढ़ीं। वहीं दूसरी ओर, कृषि और मत्स्य पालन क्षेत्र में 3.6 प्रतिशत की मध्यम वृद्धि देखी गई।
घरेलू मांग और निवेश से मिली संजीवनी
वैश्विक बाजार में बने अनिश्चितता के माहौल के बीच भारत के आंतरिक बाजार और निवेश ने अर्थव्यवस्था को संभाले रखा। कंपनियों द्वारा नए प्रोजेक्ट्स और बुनियादी ढांचे में किए जाने वाले निवेश को दर्शाने वाला ‘सकल स्थायी पूंजी निर्माण’ (GFCF) 11.9 प्रतिशत की तेज रफ्तार से बढ़ा।
इसके साथ ही, आम भारतीय परिवारों की खरीदारी क्षमता और घरेलू मांग भी मजबूत बनी रही। निजी उपभोग व्यय में 7.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई, जो यह साबित करती है कि भारतीय उपभोक्ता बाजार में लगातार खर्च कर रहे हैं। हालांकि, इस दौरान सरकारी खर्च की वृद्धि दर 4.3 प्रतिशत पर थोड़ी धीमी रही।
मजबूत नींव पर टिका है भारत का भविष्य
समग्र रूप से, सेवा क्षेत्र के शानदार प्रदर्शन, विनिर्माण क्षेत्र में आई तेजी और मजबूत घरेलू निवेश के बल पर भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में महंगा कच्चा तेल और अंतरराष्ट्रीय तनाव कुछ चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं, लेकिन भारत का मजबूत आंतरिक बाजार और सरकारी ढांचागत विकास देश को आर्थिक स्थिरता और वृद्धि के रास्ते पर बनाए रखने में पूरी तरह सक्षम है।
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