तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक निर्मल घोष को गुरुवार को ओडिशा में गिरफ्तार किया गया। यह गिरफ्तारी उस जूनियर डॉक्टर के कथित तौर पर जल्दबाजी में किए गए अंतिम संस्कार के मामले में हुई है, जिसके साथ दो साल पहले कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में रेप और हत्या की घटना हुई थी।
पुलिस के अनुसार, पानीहाटी के पूर्व विधायक घोष को सबूत मिटाने, आपराधिक साजिश रचने और किसी को उसकी मर्जी के खिलाफ काम करने के लिए मजबूर करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
जल्दबाजी में अंतिम संस्कार करने के लिए मजबूर किया
यह गिरफ्तारी तब हुई जब पीड़ित डॉक्टर के पिता ने सोमवार को खारदाह पुलिस स्टेशन में एक नई शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि घोष उन तीन लोगों में शामिल थे जिन्होंने उनकी बेटी के शव का जल्दबाजी में अंतिम संस्कार करने के लिए मजबूर किया था। बैरकपुर पुलिस कमिश्नरेट के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि यह नया मामला डॉक्टर के रेप और हत्या की सीबीआई जांच से अलग है।
न्यूज़ एजेंसी पीटीआई ने एक अज्ञात अधिकारी के हवाले से बताया, सीबीआई आरजी कर अस्पताल में रेप और हत्या के मामले की जांच कर रही है, जो कोलकाता पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आता है। खारदाह पुलिस स्टेशन में दर्ज नई एफआईआर मृतक के परिवार की शिकायतों पर आधारित हैं। परिवार का आरोप है कि सबूतों को छिपाने के लिए परिवार के सदस्यों की सहमति के बिना शव का जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कर दिया गया था।”
यह गिरफ्तारी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा डॉक्टर की दूसरी पुण्यतिथि पर आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने के कुछ दिनों बाद हुई है। उन्होंने पुलिस को अंतिम संस्कार से जुड़ी परिस्थितियों के बारे में एक अलग मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। मुख्यमंत्री ने कहा था कि अंतिम संस्कार को लेकर कई सवाल थे, जिनमें अंतिम संस्कार की फीस माफ करने का आरोप और संबंधित दस्तावेजों पर पीड़ित के परिवार के सदस्यों के हस्ताक्षर न होना शामिल है।
दस्तावेजों पर किए गए हस्ताक्षरों पर भी सवाल
31 वर्षीय पोस्टग्रेजुएट ट्रेनी डॉक्टर 9 अगस्त, 2024 को आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के सेमिनार रूम में मृत पाई गई थीं। बाद में जांचकर्ताओं ने पता लगाया कि पिछली रात उनके साथ रेप और हत्या की गई थी। पुलिस के अनुसार, शव को पानीहाटी के श्मशान घाट ले जाया गया और जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कर दिया गया। आरोप है कि इस दौरान कतार में इंतजार कर रहे दो अन्य शवों को पीछे छोड़ दिया गया।
पुलिस ने अंतिम संस्कार की सहमति वाले दस्तावेजों पर किए गए हस्ताक्षरों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ये हस्ताक्षर कथित तौर पर पड़ोसियों के थे, न कि पीड़ित के माता-पिता या परिवार के अन्य सदस्यों के। कोलकाता पुलिस से जांच का जिम्मा मिलने के बाद CBI रेप और मर्डर केस की अलग से जांच कर रही है। इस मामले में एक व्यक्ति को दोषी ठहराया गया था और अब यह मामला कलकत्ता हाई कोर्ट में लंबित है।
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