इलाहाबाद हाईकोर्ट(India) ने एक सरकारी कर्मचारी की चौथे बच्चे के लिए मैटरनिटी लीव की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। कर्मचारी ने छह महीने की छुट्टी मांगी थी लेकिन राज्य सरकार ने मौजूदा नियमों का हवाला देते हुए इसका विरोध किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
क्या था मामला?
कर्मचारी ने संबंधित अधिकारी के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें चौथे बच्चे के लिए मैटरनिटी लीव देने से मना किया गया था। उनकी ओर से दलील दी गई कि पहले तीन बच्चों के जन्म के समय उन्होंने मैटरनिटी लीव नहीं ली थी, इसलिए इस बार छुट्टी मिलनी चाहिए। हालांकि, सरकार ने कहा कि नियमों के तहत वह इस छुट्टी की पात्र नहीं हैं।
मैटरनिटी लीव का सामान्य नियम
सरकारी महिला कर्मचारियों को सामान्य तौर पर 180 दिन यानी करीब छह महीने की मैटरनिटी लीव का प्रावधान है। यह सुविधा दो से कम जीवित बच्चों वाली महिला कर्मचारी के लिए लागू होती है। छुट्टी के दौरान वेतन के बराबर लीव सैलरी मिलती है और यह सामान्य छुट्टी खाते से नहीं काटी जाती। गर्भपात या मिसकैरेज की स्थिति में सेवा अवधि के दौरान 45 दिन तक की छुट्टी का प्रावधान है। 2024 में सरोगेसी से जुड़े मामलों के लिए भी छुट्टी के प्रावधान जोड़े गए हैं।
पुरुष कर्मचारियों के लिए क्या हैं नियम ?
पुरुष सरकारी कर्मचारी को दो से कम जीवित बच्चों की स्थिति में 15 दिन की पैटरनिटी लीव मिल सकती है। इसे पत्नी की डिलीवरी से 15 दिन पहले से लेकर बच्चे के जन्म के छह महीने के भीतर लिया जा सकता है। इस दौरान पूरा वेतन मिलता है और छुट्टी सामान्य लीव खाते से नहीं घटती।