भारत ने अरुणाचल प्रदेश(Arunachal Pradesh) को लेकर चीन को एक बार फिर स्पष्ट संदेश दिया है। सर्वे ऑफ इंडिया के अपडेट किए गए आधिकारिक नक्शे में अरुणाचल प्रदेश के 27 महत्वपूर्ण स्थानों को उनके भारतीय नामों के साथ दर्ज किया गया है। इनमें पहाड़ी दर्रे, झील, बस्तियां और 1962 के भारत-चीन युद्ध से जुड़े स्मारक शामिल हैं। यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब चीन लगातार अरुणाचल प्रदेश को ‘दक्षिण तिब्बत’ बताकर वहां के स्थानों के लिए अपने नाम जारी करता रहा है।
चीन ने 2017 से कई बार अरुणाचल प्रदेश के अलग-अलग इलाकों के लिए चीनी नाम जारी किए हैं। 2025 में भी उसने 27 स्थानों के नाम बदलने की घोषणा की थी। भारत ने इन कोशिशों को खारिज करते हुए कहा है कि किसी स्थान का नाम बदल देने से जमीन पर वास्तविक स्थिति नहीं बदलती। विदेश मंत्रालय ने भी दोहराया है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है।
नक्शे में शामिल किए गए अहम स्थान
भारत के नए नक्शे में द्जो ला, रिजा ला, पुकुर ला और थग ला जैसे महत्वपूर्ण पहाड़ी दर्रों को शामिल किया गया है। थग ला का खास ऐतिहासिक महत्व है, क्योंकि 1962 के युद्ध के दौरान यह क्षेत्र संघर्ष का प्रमुख केंद्र रहा था। इसके अलावा सांबो सरोवर समेत कई बस्तियों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों को भी आधिकारिक पहचान दी गई है।
1962 के युद्ध की याद भी दर्ज
इन स्थानों में युद्ध से जुड़े स्मारकों को शामिल किया जाना भी महत्वपूर्ण है। शेर-ए-थापा मेमोरियल 1962 के युद्ध में वीरता दिखाने वाले हवलदार शेर-ए-थापा की स्मृति से जुड़ा है। इस तरह नक्शे का यह अपडेट केवल भौगोलिक जानकारी में बदलाव नहीं है, बल्कि अरुणाचल प्रदेश पर भारत की प्रशासनिक और क्षेत्रीय स्थिति को भी स्पष्ट रूप से सामने रखता है।