दिल्ली(Delhi) सरकार ने नए स्कूल खोलने की प्रक्रिया को पहले की तुलना में काफी आसान बनाने का फैसला किया है। अब राजधानी में नया स्कूल शुरू करने के लिए सरकारी मंजूरी या ‘एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट’ (Essentiality Certificate) लेना अनिवार्य नहीं होगा। इसकी जगह अब सेल्फ सर्टिफिकेशन की व्यवस्था लागू की जाएगी। इस फैसले को शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने मंजूरी दी है। सरकार का मानना है कि इससे नए स्कूलों की स्थापना में आने वाली प्रशासनिक रुकावटें कम होंगी और शिक्षा क्षेत्र में तेजी से विकास होगा।
क्या बदले हैं नियम?
इस फैसले के तहत दिल्ली स्कूल शिक्षा नियम, 1973 के कुछ प्रावधानों में बदलाव किया जाएगा। पहले किसी भी नए स्कूल को खोलने से पहले सरकार यह तय करती थी कि संबंधित इलाके में नए स्कूल की जरूरत है या नहीं। साथ ही, स्कूल संचालकों को आवेदन देकर अनुमति जैसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था।
अब इन दोनों शर्तों को समाप्त कर दिया गया है। इसके अलावा, अधिक आबादी वाले इलाकों में स्कूल खोलने के लिए जमीन से जुड़े कुछ नियमों में भी राहत दी गई है ताकि वहां नए शिक्षण संस्थान स्थापित करना आसान हो सके।
बदलाव के पीछे क्या है उद्देश्य?
सरकार का कहना है कि पुराने नियमों की वजह से नए स्कूल खोलने में काफी समय लगता था। सरकारी मंजूरी और आवश्यकता तय करने की प्रक्रिया लंबी होने के कारण कई परियोजनाएं अटक जाती थीं। नए बदलावों का उद्देश्य शिक्षा क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना और स्कूलों की संख्या बढ़ाना है। यह फैसला शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून की भावना के अनुरूप भी माना जा रहा है जिसका लक्ष्य सभी बच्चों तक बेहतर शिक्षा पहुंचाना है।
नई सेल्फ सर्टिफिकेशन प्रणाली लागू होने से स्कूल खोलने की प्रक्रिया अधिक सरल और तेज होगी। इससे खासकर घनी आबादी वाले इलाकों में नए स्कूल स्थापित करने में आसानी होगी। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से शिक्षा का बुनियादी ढांचा मजबूत होगा और छात्रों को अपने आसपास बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिक अवसर मिल सकेंगे। इससे शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।