पहलगाम आतंकी हमले की जांच में भारत ने बड़ा कानूनी कदम उठाया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की कार्रवाई के बाद जम्मू की एक अदालत ने लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद(Lashkar chief Hafiz Saeed) के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। जांच एजेंसी ने उसे मामले में आरोपी बनाया है और उसकी गैरमौजूदगी में मुकदमे की कार्रवाई आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है।
NIA की ओर से अदालत में दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट में हाफिज सईद को हमले की साजिश से जुड़ा मुख्य आरोपी बताया गया है। जांच एजेंसी का दावा है कि आतंकी हमले की योजना पाकिस्तान में बैठकर तैयार की गई थी और इसमें हाफिज की अहम भूमिका रही है।
गैरमौजूदगी में चलेगा मुकदमा
एनआईए ने अदालत को बताया कि हाफिज सईद फिलहाल पाकिस्तान में है और उसे भारत लाना संभव नहीं हो पाया है। ऐसे में कानूनी प्रावधानों के तहत उसके खिलाफ ट्रायल इन एब्सेंशिया यानी आरोपी की अनुपस्थिति में सुनवाई शुरू करने की मांग की गई है।
अदालत ने जांच एजेंसी की दलीलों पर विचार करते हुए गैर-जमानती वारंट जारी किया है। इसके बाद आरोपी को भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
क्या है ट्रायल इन एब्सेंशिया?
नए आपराधिक कानूनों में ऐसे मामलों के लिए प्रावधान किया गया है जहां कोई आरोपी जानबूझकर अदालत में पेश नहीं हो रहा हो और उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हों। ऐसी स्थिति में कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद अदालत आरोपी की गैरमौजूदगी में भी मुकदमे की सुनवाई कर सकती है।
कई आतंकी साजिशों में नाम शामिल
जांच एजेंसियों के मुताबिक, हाफिज सईद का नाम भारत में हुए कई बड़े आतंकी हमलों की साजिशों से जुड़ा रहा है। NIA का कहना है कि पहलगाम हमले की जांच के दौरान मिले सबूतों के आधार पर उसे आरोपी बनाया गया है।
बता दें कि पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने मामले की जांच तेज कर दी थी। फिलहाल आगे की कानूनी कार्रवाई अदालत की प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगी।