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गुरुग्राम में टावर ऑफ जस्टिस चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने किया लोकार्पण, CM सैनी और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल रहे मौजूद

गुरुग्राम के न्यायिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत(Chief Justice Surya Kant) ने रविवार को नवनिर्मित जिला न्यायालय परिसर “जस्टिस टॉवर” का उद्घाटन किया। इस मौके पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा सहित न्यायपालिका और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

आपको बता दें कि गुरुग्राम को लगभग 51 वर्षों के बाद नया और विशाल जिला अदालत परिसर मिला है। अत्याधुनिक सुविधाओं से लेस यह भवन उत्तर भारत के प्रमुख जिला न्यायालय परिसरों में गिना जा रहा है। नए परिसर के निर्माण से न्यायिक कार्यों को अधिक व्यवस्थित और सुचारु रूप से संचालित करने में मदद मिलेगी जिससे आम नागरिकों को काफी फायदा होगा।

पुराने परिसर की स्थिति बनी थी चुनौती

पुराने जिला अदालत परिसर में मई महीने में लगी भीषण आग की वजह से भवन के एक हिस्से को असुरक्षित घोषित करना पड़ा था। इसके बाद अदालतों का संचालन अस्थायी रूप से पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस से ही किया जा रहा था। न्यायिक कार्य प्रभावित न हों इसके लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में नए परिसर में तत्काल कामकाज शुरू करने की अनुमति प्रदान की है।

वकीलों के चैंबर को लेकर उठे सवाल

हालांकि नए परिसर में न्यायिक कार्य शुरू होने जा रहे हैं लेकिन सभी अधिवक्ताओं को अभी तक चैंबर उपलब्ध नहीं हो सके हैं। इस कारण वकीलों के एक वर्ग ने अपनी नाराजगी जताई है और पर्याप्त संख्या में चैंबर आवंटित किए जाने की मांग रखी है। उनका कहना है कि न्यायिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अधिवक्ताओं की बुनियादी सुविधाओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

गुरुग्राम में हाईकोर्ट बेंच की मांग फिर हुई तेज

इस अवसर पर कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक राव दान सिंह ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर गुरुग्राम में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की स्थायी बेंच स्थापित करने की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि दक्षिण हरियाणा के लोगों को अपने मामलों की सुनवाई के लिए चंडीगढ़ तक लंबी यात्रा करनी पड़ती है जिसमें छह से सात घंटे तक का समय लग जाता है। यदि गुरुग्राम में हाईकोर्ट की बेंच स्थापित होती है तो क्षेत्र के हजारों वादकारियों और अधिवक्ताओं को समय और संसाधनों की बचत के साथ न्याय तक आसान पहुंच मिल सकेगी।

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