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66 दिन बाद होर्मुज में सामान्य हुए हालात! ईरान से डील होते ही US ने हटाई समुद्री नाकेबंदी, ट्रंप बोले- मेरी ताकत की कोई लिमिट नहीं

Iran US Deal: अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत मिलने लगे हैं। अमेरिकी सेना ने 66 दिन बाद होर्मुज क्षेत्र में लागू समुद्री नाकेबंदी हटा ली है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी आधिकारिक जानकारी देते हुए कहा कि अब ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में आने-जाने वाले जहाजों को अमेरिकी सेना नहीं रोकेगी।

समझौते के बाद अमेरिका का बड़ा फैसला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के बीच बुधवार को हुए MoU पर हस्ताक्षर के बाद यह फैसला लिया गया है। समझौते के तहत ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को खोलने पर सहमति जताई, जबकि अमेरिका ने समुद्री नाकेबंदी हटाने का फैसला किया। हालांकि, जहाज होर्मुज में ही तैनात हैं। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने जाने-पहचाने अंदाज में नजर आए। उन्होंने साफ कहा कि ईरान के साथ टकराव से यह साबित नहीं होता कि उनकी ताकत की कोई लिमिट है। जब उनसे पूछा गया कि क्या इस टकराव से उन्हें यह सीख मिली है कि दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश का राष्ट्रपति होने के बावजूद उन्हें कुछ सीमाओं का सामना करना पड़ता है, तो ट्रंप ने जवाब दिया, ‘कोई लिमिट नहीं है।’ ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई सबक नहीं सीखा है। उनके अनुसार, अमेरिका ने ईरान को सैन्य रूप से पूरी तरह हरा दिया है और इसके परिणामस्वरूप हुआ समझौता लगभग बिना किसी शर्त के आत्मसमर्पण जैसा है।

ट्रंप समझौते के लिए क्यों तैयार हुए?

Axios से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अगर वह और सख्ती दिखाना चाहते, तो ईरान पर लगातार दो या तीन हफ़्ते तक बमबारी कर सकते थे। उन्होंने कहा, ‘मैं और ज्यादा सख्त तभी हो सकता था जब मैं दो-तीन हफ्ते और बमबारी करता। लेकिन उससे हमें क्या मिलता?’ ट्रंप के मुताबिक, अगर हमला जारी रहता, तो होर्मुज बंद रहता और दुनिया को कई महीनों तक तेल संकट का सामना करना पड़ता। ट्रंप ने कहा कि लगातार बमबारी का सबसे बड़ा असर ग्लोबल इकॉनमी पर पड़ता। उन्होंने कहा, ‘जब तक बम गिरते रहते, होर्मुज नहीं खुल सकता था। कई महीनों तक तेल नहीं मिल पाता और इससे पूरी दुनिया आर्थिक मंदी की चपेट में आ सकती थी।’ ट्रंप ने माना कि इस खतरे को देखते हुए उन्होंने समझौते का रास्ता चुना।

सेंट्रल कमांड ने दी आधिकारिक जानकारी

यूएस सेंट्रल कमांड ने X पर पोस्ट करते हुए कहा, ‘राष्ट्रपति के निर्देश के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरानी बंदरगाहों और तटीय इलाकों में आने-जाने वाले सभी समुद्री जहाजों पर लगी नाकेबंदी हटा ली है। अमेरिकी सेना ईरानी बंदरगाहों पर आने-जाने वाले जहाजों को नहीं रोक रही है।’

फिलहाल क्षेत्र में तैनात रहेंगे अमेरिकी युद्धपोत

नाकेबंदी हटाए जाने के बावजूद अमेरिकी नौसेना के जहाज अभी भी क्षेत्र में तैनात रहेंगे। सेंट्रल कमांड ने इसकी वजह बताते हुए कहा, ‘हमारे नेवी जहाज उस इलाके में मौजूद रहेंगे, ताकि यह पक्का किया जा सके कि समझौते की सभी बातों का पालन हो रहा है और वे पूरी तरह से लागू हैं। ‘

ट्रंप ने शांति बनाए रखने की अपील की

समझौते के बाद गुरुवार को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका शांति कायम रखने के लिए प्रतिबद्ध है और क्षेत्र के सभी पक्षों को बातचीत की प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए।

तेल और शेयर बाजार पर दिखा असर

ट्रंप ने कहा, ‘अमेरिका शांति के लिए प्रतिबद्ध है और हम मिडिल ईस्ट में सभी लोगों से अपील करते हैं कि वे हमारी बातचीत को सही ढंग से आगे बढ़ने देने के वादे पर कायम रहें।’ उन्होंने यह भी कहा कि समझौते के बाद बाजारों में सकारात्मक माहौल बना है, तेल की कीमतों में गिरावट आई है और शेयर बाजारों में तेजी देखी जा रही है।

युद्धविराम की उम्मीद भी जताई

ट्रंप ने अपने संदेश में कहा, ‘बाजार खुश हैं, क्योंकि तेल की कीमतें काफी कम हो गई हैं और शेयरों के दाम काफी बढ़ गए हैं। हम लेबनान, हिज्बुल्लाह और इजरायल समेत सभी मोर्चों पर पूरी तरह से युद्धविराम की उम्मीद करते हैं।’

13 अप्रैल से लागू थी नाकेबंदी

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद क्षेत्र में समुद्री गतिविधियां प्रभावित हुई थीं। अमेरिका ने 28 फरवरी को इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमला किया था, जिसके बाद हालात युद्ध जैसे बन गए थे। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया था।

होर्मुज बंद होने से बढ़ी थीं मुश्किलें

होर्मुज स्ट्रेट बंद किए जाने के बाद अमेरिका ने क्षेत्र में समुद्री नाकेबंदी लागू कर दी थी। इसके चलते जहाजों की आवाजाही और अधिक कठिन हो गई थी। हालांकि अब MoU पर हस्ताक्षर होने और होर्मुज के दोबारा खुलने के बाद 66 दिनों से जारी अमेरिकी नाकेबंदी भी समाप्त कर दी गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को राहत मिलने की उम्मीद है।

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Yogita Tyagi
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योगिता त्यागी एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, मनोरंजन, धर्म और लाइफस्टाइल विषयों में विशेष रुचि है। वर्तमान में वह Mhone News के राजनीतिक, धर्म और मनोरंजन सेक्शन के लिए सक्रिय रूप से लेखन कर रही हैं। डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने अपने करियर में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों- जैसे दैनिक भास्कर, पंजाब केसरी, इंडिया डेली लाइव और ITV नेटवर्क में योगदान दिया है। योगिता ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU) से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है, जिसने उनके डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में गहन, प्रभावशाली और विश्वसनीय लेखन की मजबूत नींव रखी है।
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