महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह लोकसभा सांसदों को संभावित सुरक्षा खतरे को देखते हुए ‘वाई-प्लस’ सुरक्षा प्रदान की गई है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब इन सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने की अटकलें तेज हैं और उनके खिलाफ पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है।
महाराष्ट्र में बढ़ा राजनीतिक तनाव
इन सांसदों के संभावित दलबदल की चर्चाओं के बाद कई क्षेत्रों में शिवसेना यूबीटी कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। स्थिति को देखते हुए खुफिया विभाग की रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षा बढ़ाने का फैसला लिया गया। वाई-प्लस सुरक्षा में कुल 11 सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं, जो इन सांसदों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।
यूबीटी कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के कारण फैसला
जिन छह सांसदों को सुरक्षा दी गई है, उनमें संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल-अष्टीकर और ओमप्रकाश राजे निंबालकर शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम संभावित राजनीतिक टकराव और विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए एहतियातन उठाया गया है।
बागी सांसदों पर संजय राउत ने साधा निशाना
शिवसेना यूबीटी के नेता संजय राउत ने इन घटनाओं पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए सांसदों को ‘गद्दार’ बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी छोड़ने की तैयारी कर रहे नेताओं को शिवसैनिकों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। राउत ने इसे “ऑपरेशन तुड़वा” से जोड़ते हुए सरकार और बागी नेताओं पर निशाना साधा।
शुक्रवार को शिंदे गुट में नहीं शामिल होंगे बागी सांस
सूत्रों के अनुसार, इन छह सांसदों के शिंदे गुट में औपचारिक शामिल होने का कार्यक्रम फिलहाल टाल दिया गया है। पहले माना जा रहा था कि ये सांसद शुक्रवार को शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं, लेकिन अब इस आयोजन को स्थगित कर दिया गया है।
राजनीतिक असर पर टिकी निगाहें
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये सांसद शिंदे गुट में शामिल होते हैं तो यह उद्धव ठाकरे गुट के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है। इससे महाराष्ट्र की राजनीति में शक्ति संतुलन बदलने की संभावना भी जताई जा रही है।
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