राजधानी दिल्ली(Delhi) में नवजात बच्चों की अवैध खरीद-फरोख्त से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट टीम ने कार्रवाई करते हुए इस अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मामले में अस्पताल संचालक समेत 13 लोगों को गिरफ्तार किया है जबकि गिरोह के चंगुल से पांच नवजात बच्चों को सुरक्षित बचाया गया है।
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह केवल दिल्ली तक सीमित नहीं था बल्कि इसका जाल हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात तक फैला हुआ था। पुलिस के मुताबिक, आरोपी पिछले करीब डेढ़ साल से इस अवैध धंधे को चला रहे थे और निसंतान दंपतियों को निशाना बनाकर बच्चों की डील करते थे।
फर्जी ग्राहक बनकर पुलिस ने बिछाया जाल
पुलिस को इस गिरोह के बारे में 5 जून को अहम सुराग मिला। सूचना मिली थी कि पहाड़गंज इलाके में एक नवजात बच्चे को बेचने की तैयारी चल रही है। इसके बाद पुलिस की ऑपरेशन यूनिट ने रणनीति बनाकर फर्जी ग्राहक के जरिए आरोपियों तक पहुंचने की योजना बनाई।
कार्रवाई के दौरान आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन के पास तीन लोगों को पकड़ा गया। इनमें ज्योति उर्फ कमलेश, शालू और ललित शामिल थे। पुलिस ने उनके कब्जे से चार-पांच दिन के एक नवजात बच्चे को बरामद किया। मौके से 20 हजार रुपये की टोकन रकम भी मिली जो कथित तौर पर बच्चे की खरीद के लिए दी गई थी।
गरीब परिवारों से खरीदकर लाखों में बेचते थे बच्चे
पूछताछ में पुलिस को पता चला कि यह गिरोह एक संगठित तरीके से काम कर रहा था। आरोपी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से बेहद कम रकम में बच्चों को हासिल करते थे और बाद में उन्हें लाखों रुपये में बेच देते थे।
जांच के अनुसार, गिरोह निसंतान दंपतियों को अपने जाल में फंसाता था और बच्चों को गोद देने की प्रक्रिया को सही दिखाने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करता था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि एक नवजात को 6 से 9 लाख रुपये तक में बेचा जाता था।
सवालों के घेरे में संचालिका अस्पताल
मामले की जांच आगे बढ़ने पर दिल्ली के बेगमपुर स्थित हीरा मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल से जुड़ी एक अहम भूमिका सामने आई। पुलिस के अनुसार, अस्पताल संचालिका डॉ. विवेकी पर आरोप है कि वह बच्चों को छिपाने, संभावित खरीदारों से संपर्क कराने और दस्तावेजों से जुड़ी मदद करने में शामिल थीं। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
इन राज्यों से पुलिस को मिले बच्चे
जांच के दौरान पुलिस ने मध्य प्रदेश के ग्वालियर और हरियाणा के पानीपत से चार और बच्चों को बरामद किया। इस तरह कुल पांच नवजातों को सुरक्षित बचाया गया। इनमें से चार बच्चों के आदिवासी परिवारों से जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। सभी बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सामने पेश किया गया है जहां से उनकी देखभाल और पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
पुलिस अब बच्चों के वास्तविक माता-पिता की पहचान करने में जुटी है। पुलिस ने गिरोह के कथित मुख्य सप्लायर कालिया उर्फ सयबाभाई घामर को गुजरात से गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वह राजस्थान और गुजरात से बच्चों की व्यवस्था कर इस नेटवर्क तक पहुंचाता था। दिल्ली पुलिस का दावा है कि यह गिरोह पिछले डेढ़ साल में 30 से ज्यादा नवजात बच्चों की अवैध खरीद-फरोख्त कर चुका है।