बिहार के मुजफ्फरपुर(Muzaffarpur) में पुलिस ने NEET परीक्षा से जुड़े एक बड़े ऑनलाइन ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह टेलीग्राम प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर देशभर के मेडिकल प्रवेश परीक्षा अभ्यर्थियों को फर्जी प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने का झांसा देता था। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने गिरोह के चार और सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद अब तक इस पूरे नेटवर्क से जुड़े कुल पांच लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
मुजफ्फरपुर पुलिस को मिली गोपनीय सूचना के आधार पर एक विशेष टीम का गठन किया गया था। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देशन में चलाए गए अभियान के दौरान विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर चार आरोपियों को हिरासत में लिया गया। गिरफ्तार किए गए युवकों से पूछताछ के बाद कई अहम जानकारियां सामने आई हैं जिनके आधार पर पुलिस आगे की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह संगठित तरीके से काम कर रहा था और परीक्षा से पहले छात्रों को यह विश्वास दिलाता था कि उनके पास NEET का वास्तविक प्रश्न पत्र मौजूद है।
ऐसे चलाया जाता था ठगी का खेल
जांच में सामने आया है कि आरोपी टेलीग्राम चैनलों और ग्रुपों के माध्यम से मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों तक पहुंच बनाते थे। इसके बाद वे छात्रों को परीक्षा से पहले प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने का दावा करते थे। जब कोई छात्र उनके झांसे में आ जाता तो उससे ऑनलाइन भुगतान करने के लिए कहा जाता था।
आरोपी क्यूआर कोड, डिजिटल वॉलेट या बैंक खातों के माध्यम से रकम हासिल करते थे। भुगतान मिलने के बाद छात्रों को या तो पुराने प्रश्न पत्र भेज दिए जाते थे या फिर पूरी तरह से फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते थे। इस तरह अभ्यर्थियों की परीक्षा को लेकर चिंता और उत्सुकता का फायदा उठाकर उनसे मोटी रकम वसूली जाती थी।
मास्टरमाइंड पहले ही हो चुका गिरफ्तार
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस नेटवर्क का मुख्य संचालक मनीष झा नामक व्यक्ति बताया जा रहा है जिसे पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। उसके पास से मोबाइल फोन और एक लैपटॉप भी बरामद किया गया था।
जांच में यह जानकारी सामने आई है कि गिरोह के अन्य सदस्य छात्रों से प्राप्त रकम को मुख्य सरगना तक पहुंचाने का काम करते थे।पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि यह नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और देश के कितने राज्यों में इसके तार फैले हुए हैं।
डिजिटल सबूतों की जांच जारी
गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से बरामद मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है। इसके अलावा बैंक खातों, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और टेलीग्राम चैट्स की भी पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर कई और महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।