दिल्ली में रहने वाले शिवभक्तों और कांवड़ समितियों के लिए प्रशासन की ओर से महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। साल 2026 की कांवड़ यात्रा(Kanwar Yatra) को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से 4 जून को दिल्ली सचिवालय में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में यात्रा की तैयारियों, व्यवस्थाओं और नियमों को लेकर कई अहम फैसले लिए गए। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने की जिसमें स्पष्ट किया गया कि इस बार श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
1 जुलाई से शुरू होगा कांवड़ समितियों का रजिस्ट्रेशन
सरकार ने निर्णय लिया है कि 1 जुलाई 2026 से दिल्ली में सभी कांवड़ समितियों के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया अनिवार्य रूप से शुरू की जाएगी। जो भी संगठन या समिति कांवड़ शिविर, भंडारा या अन्य सेवा शिविर लगाना चाहती है उसे पहले पंजीकरण कराना होगा।
प्रशासन ने साफ किया है कि बिना रजिस्ट्रेशन किसी भी प्रकार के शिविर लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके लिए एक ऑनलाइन और निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होगा ताकि सभी व्यवस्थाओं का रिकॉर्ड सही तरीके से रखा जा सके।
यात्रा प्रबंधन के लिए विशेष समिति का गठन
इस बार कांवड़ यात्रा के बेहतर संचालन के लिए सरकार ने एक विशेष छह सदस्यीय समिति का गठन भी किया है। इस टीम का नेतृत्व कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा करेंगे। यह समिति दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों के साथ समन्वय बनाकर काम करेगी ताकि यात्रा के दौरान किसी भी स्तर पर अव्यवस्था न हो। समिति का उद्देश्य सभी शिविरों की निगरानी, व्यवस्थाओं की समीक्षा और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना होगा।
पंचांग के मुताबिक, सावन का पवित्र महीना 30 जुलाई 2026 से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 तक चलेगा। इस दौरान बड़ी संख्या में कांवड़ यात्री दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों से गुजरेंगे। अनुमान है कि इस अवधि में राजधानी और आसपास के इलाकों में धार्मिक माहौल और गतिविधियां चरम पर रहेंगी। सरकार दिल्ली पुलिस, MCD और PWD जैसे विभाग मिलकर पूरे महीने की व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने में जुट गए हैं।
शिविरों और भंडारों के लिए जरूरी नियम
कांवड़ यात्रा के दौरान शिविर लगाने वाले आयोजकों के लिए कई निर्देश जारी किए गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा:
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सभी समितियों को समय पर पंजीकरण कराना जरूरी होगा।
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शिविर परिसर में स्वच्छता और स्वास्थ्य मानकों का पालन अनिवार्य रहेगा।
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वॉलंटियर्स और सहयोगियों की जानकारी स्थानीय प्रशासन और पुलिस को देनी होगी।
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सुरक्षा नियमों का पालन किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकेगा।

