देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG(NEET paper leak) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। शुक्रवार को जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई की। इस दौरान अदालत ने साफ संकेत दिए कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए केवल अस्थायी उपाय पर्याप्त नहीं हैं बल्कि व्यापक संस्थागत बदलाव की आवश्यकता है।
सुनवाई के दौरान NTA की ओर से अदालत को बताया गया कि आगामी वर्ष से NEET-UG परीक्षा को पारंपरिक पेन-पेपर मोड के बजाय कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) के रूप में आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। एजेंसी का मानना है कि डिजिटल माध्यम अपनाने से परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।
प्रधानमंत्री स्तर पर हो रही है निगरानी
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा से जुड़े मुद्दों को सरकार अत्यंत गंभीरता से देख रही है। उन्होंने कहा कि यह मामला सीधे लाखों छात्रों और उनके भविष्य से जुड़ा हुआ है इसलिए केंद्र सरकार विशेष रूप से सतर्क है। सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस पूरे विषय पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और छात्रों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
छात्रों की मेहनत और सपनों का सम्मान जरूरी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की भावनाओं और वर्षों की मेहनत का उल्लेख करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली में होने वाली गलतियों का असर केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उनके परिवार भी इससे प्रभावित होते हैं। अदालत ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में छात्र कई वर्षों का समय, ऊर्जा और समर्पण लगाते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक चूक उनके सपनों को गहरा आघात पहुंचा सकती है।
UPSC का उदाहरण देकर NTA को दी सीख
अदालत ने NTA के भीतर जवाबदेही और क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। जस्टिस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं को व्यक्तियों पर निर्भर रहने के बजाय मजबूत संस्थागत ढांचे पर काम करना चाहिए।इसी संदर्भ में अदालत ने UPSC का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ संस्थानों ने वर्षों से बड़े पैमाने पर परीक्षाओं का सफल संचालन किया है और वे भरोसे की मिसाल बने हुए हैं।
अदालत का संकेत था कि NTA को भी ऐसी संस्थाओं से सीख लेकर अपनी प्रक्रियाओं को अधिक मजबूत और भरोसेमंद बनाना चाहिए।सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार से NTA की संगठनात्मक क्षमता बढ़ाने और मानव संसाधनों को मजबूत करने की दिशा में उठाए जाने वाले कदमों की विस्तृत जानकारी मांगी है। अदालत ने निर्देश दिया कि इस संबंध में एक विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत किया जाए, जिसमें सुधार योजनाओं और जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया का स्पष्ट विवरण हो।