पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता का असर अब भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों(Petrol and Diesel Rates) पर साफ दिखाई देने लगा है। सोमवार को ईंधन की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। दिल्ली में पेट्रोल का दाम बढ़कर 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया है। पिछले दस दिनों में यह चौथी बार है जब ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।
लगातार बढ़ते दामों ने आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ परिवहन और व्यापार क्षेत्र से जुड़े लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है। रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर माल ढुलाई तक हर चीज की लागत प्रभावित हो रही है जिसका असर अंततः महंगाई के रूप में सामने आ रहा है।
CTI ने सरकार से की राहत की मांग
इसी स्थिति को देखते हुए चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने सरकार से तुरंत राहत देने की मांग की है। CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर सुझाव दिया है कि देशभर में सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों की आपात बैठक बुलाई जाए। उनका कहना है कि इस मुद्दे पर एक साझा रणनीति बनाना जरूरी है ताकि उपभोक्ताओं को राहत दी जा सके।
CTI ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि अगले तीन महीनों के लिए पेट्रोल और डीजल पर पूरे देश में केवल 5 प्रतिशत फ्लैट VAT लागू किया जाए। संगठन का दावा है कि इस कदम से आम जनता को प्रति लीटर 10 से 15 रुपये तक की राहत मिल सकती है। इससे न केवल उपभोक्ताओं पर बोझ कम होगा बल्कि महंगाई की रफ्तार पर भी कुछ हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा।
बृजेश गोयल ने पत्र में क्या लिखा ?
बृजेश गोयल ने अपने पत्र में यह भी कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाला एक्साइज ड्यूटी केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है, जबकि VAT राज्यों द्वारा तय किया जाता है। ऐसे में मौजूदा स्थिति में राहत देने के लिए केंद्र और राज्य दोनों को मिलकर कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जब देश के 21 राज्यों में भाजपा या एनडीए की सरकारें हैं तो नीति स्तर पर समन्वय और तेज किया जा सकता है।
CTI ने अलग-अलग राज्यों में लगाए जा रहे VAT के अंतर को भी उजागर किया है। संगठन के अनुसार तेलंगाना में पेट्रोल पर करीब 35.20 प्रतिशत VAT लगाया जाता है, जबकि आंध्र प्रदेश में 31 प्रतिशत VAT के साथ अतिरिक्त कर भी वसूला जाता है। दिल्ली में यह दर लगभग 19.40 प्रतिशत है। वहीं अंडमान-निकोबार में केवल 1 प्रतिशत VAT होने के कारण वहां ईंधन अपेक्षाकृत सस्ता मिलता है।
दिल्ली में तेजी से बढ़ी कीमत
संगठन का यह भी कहना है कि दिल्ली में कुछ समय पहले पेट्रोल की बेस कीमत लगभग 66.29 रुपये और डीजल की 67.36 रुपये प्रति लीटर थी लेकिन विभिन्न करों के जुड़ने के बाद अंतिम खुदरा कीमत काफी अधिक हो जाती है।